Bangladesh – शेख हसीना ने दोहराई दिसंबर में स्वदेश लौटने की इच्छा
Bangladesh – बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वह इस वर्ष दिसंबर में अपने देश लौटने का इरादा रखती हैं। भारत में निर्वासन के दौरान विदेशी पत्रकारों से वर्चुअल बातचीत में उन्होंने कहा कि वह हमेशा विदेश में नहीं रह सकतीं और अपने लोगों के बीच वापस जाना चाहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वापसी के बाद उन्हें गिरफ्तारी या अन्य कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़े, तब भी वह अपने फैसले से पीछे नहीं हटेंगी।

वापसी को लेकर रखी स्पष्ट राय
शेख हसीना ने कहा कि उन्हें इस बात का अंदाजा है कि मौजूदा परिस्थितियों में देश लौटने पर उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि वह अपने निर्णय पर कायम हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वापसी की सटीक तारीख उचित समय पर सार्वजनिक की जाएगी। उनके अनुसार, बांग्लादेश को विकास, शांति और लोकतांत्रिक मूल्यों की दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
बेटे सजीब वाजेद ने सरकार पर साधा निशाना
नई दिल्ली स्थित South Asia Foreign Correspondents Club को संबोधित करते हुए शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने भी बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि देश गंभीर राजनीतिक और संस्थागत चुनौतियों का सामना कर रहा है। वाजेद ने आरोप लगाया कि वहां मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है तथा मौजूदा हालात क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय हो सकते हैं।
लोकतंत्र और मानवाधिकार का उठाया मुद्दा
सजीब वाजेद ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना और नागरिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने पत्रकारों की स्थिति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
अवामी लीग से जुड़े मुद्दों पर भी रखी बात
शेख हसीना ने बातचीत के दौरान अवामी लीग पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग की। उन्होंने राजनीतिक बंदियों की रिहाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बहाल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी राजनीतिक दलों को निष्पक्ष माहौल मिलना चाहिए।
छात्र आंदोलन पर जताई अलग राय
पूर्व प्रधानमंत्री ने वर्ष 2024 के छात्र आंदोलन को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनकी नजर में यह केवल शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन नहीं था। उनका आरोप था कि इस आंदोलन का इस्तेमाल राजनीतिक बदलाव के उद्देश्य से किया गया और इसके दौरान कई सरकारी संस्थानों तथा पुलिस प्रतिष्ठानों पर हमले हुए। उन्होंने कहा कि उस समय कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी थी।
पूर्व मंत्री ने भी लोकतंत्र की वकालत की
बांग्लादेश के पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नौफुल ने भी मौजूदा हालात पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और बांग्लादेश के मित्र देशों को लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थन करना चाहिए। वहीं, सजीब वाजेद ने वर्तमान प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कानून-व्यवस्था तथा मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त की। फिलहाल इन बयानों पर बांग्लादेश की मौजूदा सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।