झारखण्ड

Missing children rescued in Ramgarh: रांची से किडनैप हुए मासूमों की घर वापसी, बजरंग दल के शेरों ने दबोचे अपहरणकर्ता…

Missing children rescued in Ramgarh: राजधानी रांची में बीते कई दिनों से मासूम बच्चों के गायब होने के बाद जो डर का माहौल बना हुआ था, वह आखिरकार खत्म हो गया है। जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के मौसीबाड़ी खटाल से रहस्यमयी तरीके से लापता हुए दो मासूमों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है। पुलिस ने (Child kidnapping case recovery) को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए रामगढ़ जिले के चितरपुर इलाके की एक स्लम बस्ती से दोनों बच्चों को खोज निकाला। इस खबर के मिलते ही बच्चों के परिजनों के चेहरे पर खुशी लौट आई है और उन्होंने राहत की सांस ली है, जबकि पूरे इलाके में पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना हो रही है।

Missing children rescued in Ramgarh
Missing children rescued in Ramgarh
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बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की मुस्तैदी ने बचाया जीवन

इस पूरी बरामदगी के पीछे स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सतर्कता का बड़ा हाथ रहा है। चितरपुर की बस्ती में संदिग्धों के साथ घूम रहे बच्चों को (Local vigilante group assistance) के तौर पर बजरंग दल के युवकों ने पहचान लिया था। उन्हें बच्चों के हाव-भाव देखकर कुछ अनहोनी का शक हुआ, जिसके बाद उन्होंने तुरंत बच्चों को अपने संरक्षण में लिया और बिना समय गंवाए स्थानीय पुलिस को मामले की जानकारी दी। अगर इन युवाओं ने समय रहते सक्रियता नहीं दिखाई होती, तो शायद बच्चों के साथ कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी।

रामगढ़ एसपी की देखरेख में पकड़े गए मास्टरमाइंड

सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने घेराबंदी की और दोनों बच्चों को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया। इस दौरान पुलिस ने मौके से दो संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया है जो बच्चों के साथ मौजूद थे। (Arrest of abduction suspects) के बाद रामगढ़ एसपी खुद मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन आरोपियों का मकसद क्या था और क्या वे किसी बड़े अंतर्राज्यीय बच्चा चोर गिरोह का हिस्सा हैं या यह किसी आपसी रंजिश का परिणाम था।

जगन्नाथपुर के मौसीबाड़ी खटाल से शुरू हुई थी कहानी

आपको बता दें कि यह पूरी घटना 2 जनवरी को शुरू हुई थी, जब जगन्नाथपुर स्थित मौसीबाड़ी खटाल से अंश और अंशिका अचानक गायब हो गए थे। (Missing children search operation) के तहत बच्चों के माता-पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद रांची पुलिस के हाथ-पांव फूल गए थे। बच्चों की उम्र कम होने के कारण पुलिस पर भारी दबाव था और मामला हाई-प्रोफाइल होने की वजह से मुख्यालय स्तर से भी इसकी मॉनिटरिंग की जा रही थी।

पांच राज्यों की खाक छान रही थी पुलिस की टीमें

बच्चों की तलाश में रांची पुलिस ने कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी। पुलिस की अलग-अलग टीमें दिल्ली, मुंबई, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे (Interstate police coordination efforts) वाले इलाकों में लगातार छापेमारी कर रही थी। पुलिस को संदेह था कि अपहरणकर्ता बच्चों को राज्य की सीमा से बाहर ले जा सकते हैं, इसलिए रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर भी भारी चेकिंग अभियान चलाया गया था। हालांकि, अपहरणकर्ता राज्य के भीतर ही रामगढ़ में छिपकर पुलिस को चकमा देने की कोशिश कर रहे थे।

स्लम बस्ती को बनाया था छिपने का ठिकाना

अपहरणकर्ताओं ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए रामगढ़ के चितरपुर की एक घनी झुग्गी बस्ती को अपना सुरक्षित ठिकाना बनाया था। (Identifying criminal hideouts) के दौरान यह सामने आया कि आरोपियों को लगा था कि भीड़भाड़ वाली बस्ती में कोई उन पर शक नहीं करेगा। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि बस्ती में क्या किसी ने उनकी मदद की थी या वे अपनी पहचान बदलकर वहां रह रहे थे। स्लम बस्ती के अन्य निवासियों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के नेटवर्क का पता चल सके।

परिजनों के आंसू और पुलिस के प्रति आभार

जैसे ही रांची पुलिस ने बच्चों की बरामदगी की सूचना परिजनों को दी, पूरा परिवार भावुक हो गया। 2 जनवरी से लेकर अब तक (Family reunion after trauma) का जो लंबा और दर्दनाक इंतजार था, वह आखिरकार खत्म हुआ। बच्चों के पिता ने रांची पुलिस और रामगढ़ के उन स्थानीय युवकों का आभार व्यक्त किया है जिनकी वजह से उनके आंगन की खुशियां वापस लौटी हैं। बच्चों की काउंसलिंग की भी तैयारी की जा रही है ताकि उन्हें इस भयानक अनुभव के सदमे से बाहर निकाला जा सके।

कानून का शिकंजा और आगे की जांच

फिलहाल, दोनों बच्चे पुलिस की सुरक्षा में हैं और जल्द ही उन्हें कानूनी औपचारिकताओं के बाद रांची लाया जाएगा। (Criminal investigation and prosecution) की प्रक्रिया के तहत पकड़े गए दोनों संदिग्धों को अदालत में पेश किया जाएगा। रामगढ़ और रांची पुलिस संयुक्त रूप से इस गिरोह के पिछले रिकॉर्ड खंगाल रही है। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि जनता और पुलिस के आपसी समन्वय से बड़े से बड़े अपराध को नाकाम किया जा सकता है।

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