राष्ट्रीय

ProtestCase – समझौते के बाद लिखित आश्वासन पर फिर आमने-सामने आए पक्ष

ProtestCase– शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर समाप्त हुए आंदोलन के बाद अब प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों और गिरफ्तार लोगों की रिहाई का मुद्दा फिर चर्चा में है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आरोप लगाया है कि आंदोलन समाप्त करने के समय जिन मामलों में राहत का आश्वासन दिया गया था, उसका लिखित दस्तावेज अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। संगठन का कहना है कि यदि वादों को लागू नहीं किया गया तो वह दोबारा आंदोलन का रास्ता अपना सकता है।

protest case written assurance

समझौते के बाद लिखित दस्तावेज पर बढ़ा विवाद

20 जून से शुरू हुआ आंदोलन 25 जुलाई को उस समय समाप्त हुआ था, जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत हुई। वार्ता के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और CJP के प्रतिनिधियों ने कहा था कि दिल्ली और भाजपा शासित राज्यों में आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने तथा भविष्य में प्रदर्शनकारियों पर प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं करने पर सहमति बनी है। इसके बाद बिहार और असम में कुछ मामलों की वापसी और कुछ गिरफ्तार लोगों की रिहाई की प्रक्रिया भी शुरू हुई। हालांकि, समझौते की लिखित प्रति सार्वजनिक न होने से अब नया विवाद खड़ा हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से बढ़ी चिंता

मामले ने नया मोड़ तब लिया जब सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि जांच प्रक्रिया जारी रह सकती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान ऐसे लोगों को गिरफ्तार न किया जाए जिनके खिलाफ ठोस आधार न हों। केंद्र और संबंधित राज्यों को अगली सुनवाई में अपना पक्ष रखने के लिए 3 अगस्त की तारीख दी गई है। अदालत की इस टिप्पणी के बाद आंदोलनकारी संगठन ने आशंका जताई है कि जांच जारी रहने से पहले हुए आश्वासनों के क्रियान्वयन पर असर पड़ सकता है।

CJP ने सरकार से वादा निभाने की अपील की

संगठन के नेता सौरव दास ने कहा कि सरकार को अदालत के समक्ष यह भी बताना चाहिए कि 25 जुलाई की वार्ता में मामलों को वापस लेने का आश्वासन दिया गया था। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहीं भी मामलों की वापसी पर रोक नहीं लगाई गई है। इसलिए जिन राज्यों में सरकार चाहे, वहां कानूनी प्रक्रिया के तहत मुकदमे आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहती है तो संगठन आगे की रणनीति पर विचार करेगा।

लिखित आश्वासन नहीं मिलने पर जताई नाराजगी

सौरव दास ने दावा किया कि वार्ता के दौरान उन्हें बताया गया था कि समझौते का लिखित दस्तावेज कुछ दिनों में उपलब्ध करा दिया जाएगा। उनका आरोप है कि अब सरकार अदालत में मामला विचाराधीन होने का हवाला देकर लिखित आश्वासन देने से बच रही है। संगठन का कहना है कि भरोसे के आधार पर आंदोलन समाप्त किया गया था और यदि उस भरोसे का पालन नहीं हुआ तो आगे फिर से आंदोलन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

वार्ता के दौरान क्या कहा गया था

25 जुलाई को हुई तीसरे दौर की बातचीत के बाद जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और CJP के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से आंदोलन समाप्त होने की घोषणा की थी। उस समय सरकार की ओर से कहा गया था कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों, भविष्य में किसी नई कार्रवाई से बचने और अन्य मांगों पर सकारात्मक चर्चा हुई है। वहीं संगठन के प्रतिनिधियों ने भी कहा था कि तय समय सीमा के भीतर मांगों पर कार्रवाई के आश्वासन के आधार पर आंदोलन समाप्त किया जा रहा है।

कुछ राज्यों में कार्रवाई शुरू, आगे के फैसले पर नजर

सरकारी स्तर पर बिहार और असम में आंदोलन से जुड़े कई मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है। साथ ही कुछ गिरफ्तार लोगों की रिहाई भी हुई है। फिलहाल इस मुद्दे पर आगे की स्थिति सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और सरकार की अगली कार्रवाई पर निर्भर करेगी। दोनों पक्षों की निगाह अब इस बात पर है कि अदालत और सरकार आगे क्या रुख अपनाते हैं।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.