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Uttarakhand News: उत्तराखंड में शहरी समस्याओं के समाधान के लिए एआई आधारित नई पहल

Uttarakhand News: उत्तराखंड में शहरी गवर्नेंस को मजबूत बनाने की दिशा में एक नई और तकनीक आधारित पहल की शुरुआत की जा रही है। बिजली, पानी, ट्रैफिक, सड़क और परिवहन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली जाएगी। इस आधुनिक प्रयोग की शुरुआत राजधानी देहरादून के राजपुर रोड और सहस्त्रधारा रोड से की जा रही है, जहां एआई आधारित पायलट प्रोजेक्ट को लागू किया जाएगा।

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एआई पायलट प्रोजेक्ट पर काम शुरू

शहरी विकास और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने नगर निकायों में विकास कार्यों को नई दिशा देने के लिए तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इसी कड़ी में नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एआई आधारित पायलट प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक कैमरों और एआई सिस्टम के माध्यम से शहर की विभिन्न समस्याओं की पहचान की जाएगी और उनके समाधान की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।

अन्य शहरों में भी लागू हो सकता है मॉडल

शहरी विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसार देहरादून में यह पायलट प्रोजेक्ट एक प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया है। यदि यहां इसका प्रदर्शन संतोषजनक रहता है, तो भविष्य में इसे उत्तराखंड के अन्य शहरों में भी लागू किया जा सकता है। इससे शहरी प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी और समस्याओं का समाधान समय पर संभव हो सकेगा।

पायलट प्रोजेक्ट का परीक्षण क्षेत्र

पायलट प्रोजेक्ट के लिए देहरादून के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण इलाकों को चुना गया है। यह क्लोज लूप रूट राजपुर गांव से शुरू होकर राजपुर रोड होते हुए घंटाघर तक जाएगा। इसके बाद सहस्त्रधारा क्रॉसिंग से सहस्त्रधारा रोड होते हुए आईटी पार्क तक की सड़कों को इस परियोजना के अंतर्गत कवर किया जाएगा। इन क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जाएगी ताकि वास्तविक समय की स्थिति सामने आ सके।

पांच मॉड्यूल एक साथ करेंगे काम

इस एआई अभियान के तहत पांच अलग-अलग मॉड्यूल पर एक साथ काम किया जाएगा। बुनियादी ढांचे के अंतर्गत सड़कों और नालियों की स्थिति, साइनबोर्ड और स्ट्रीट लाइट की निगरानी की जाएगी। सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए कूड़े के ढेर और गंदगी वाले हॉटस्पॉट चिन्हित किए जाएंगे। इसके अलावा अवैध होर्डिंग्स और अतिक्रमण की पहचान, अवैध पार्किंग पर नजर और बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों की निगरानी भी इस सिस्टम का हिस्सा होगी।

कैसे काम करेगी एआई आधारित प्रणाली

इस प्रणाली के तहत विशेष कैमरे वाहनों पर लगाए जाएंगे, जो सड़कों और आसपास के इलाकों की तस्वीरें लेंगे। इन तस्वीरों का विश्लेषण एआई मॉडल के जरिए किया जाएगा। इसके बाद फिजिकल वेरिफिकेशन के माध्यम से डेटा की पुष्टि की जाएगी। अंत में, सभी सूचनाओं को एक डिजिटल डैशबोर्ड पर मैप के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे अधिकारी तुरंत आवश्यक कार्रवाई कर सकेंगे।

निगरानी और कार्रवाई का तय होगा समय

एआई सिस्टम के जरिए मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। शुरुआत में हर 15 दिन में समीक्षा और कार्रवाई होगी। इसके बाद यह प्रक्रिया एक महीने और फिर लंबे समय में साल में दो बार दोहराई जाएगी। इससे शहरी प्रशासन को निरंतर फीडबैक मिलता रहेगा और योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।

इस पहल से उत्तराखंड के शहरों में स्मार्ट गवर्नेंस को बढ़ावा मिलेगा और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।

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