Politics – आरजेडी छोड़ने के बाद मृत्युंजय तिवारी आज थाम सकते हैं भाजपा का दामन
Politics- राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से अलग होने के बाद लंबे समय तक पार्टी का चेहरा रहे मृत्युंजय तिवारी अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में नई राजनीतिक पारी शुरू करने जा रहे हैं। उन्होंने स्वयं पुष्टि की है कि शुक्रवार को पटना में भाजपा के प्रदेश नेतृत्व की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे। करीब दस वर्षों तक आरजेडी के प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी निभाने वाले तिवारी ने 16 जुलाई को पार्टी से इस्तीफा दिया था। उन्होंने उस समय संगठन के भीतर लगातार उपेक्षा और सम्मान न मिलने को अपने फैसले की मुख्य वजह बताया था।

कई महीनों से नेतृत्व तक पहुंचा रहे थे अपनी बात
मृत्युंजय तिवारी का कहना है कि बीते सात से आठ महीनों के दौरान उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व, जिसमें तेजस्वी यादव भी शामिल हैं, के सामने अपनी नाराजगी कई बार रखी। उनके अनुसार, लंबे समय तक संगठन के लिए सक्रिय रहने के बावजूद उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी कारण उन्होंने आरजेडी से अलग होने का निर्णय लिया और अब नए राजनीतिक विकल्प के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है।
इस्तीफा रोकने की कोशिश भी नहीं आई काम
तिवारी के इस्तीफे के बाद आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने उन्हें निर्णय पर पुनर्विचार करने की सलाह दी थी। उन्होंने तेजस्वी यादव के विदेश दौरे से लौटने तक इंतजार करने का आग्रह भी किया था। पार्टी के कुछ अन्य नेताओं ने भी उनसे बातचीत कर मनाने का प्रयास किया, लेकिन मृत्युंजय तिवारी अपने फैसले पर कायम रहे। उनका कहना था कि जब संगठन में सम्मान और संवाद की गुंजाइश नहीं बची, तब रुकने का कोई औचित्य नहीं है।
पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण नेताओं में रही पहचान
भागलपुर निवासी मृत्युंजय तिवारी आरजेडी के उन चुनिंदा ब्राह्मण नेताओं में गिने जाते रहे हैं, जिन्होंने लंबे समय तक सार्वजनिक मंचों और मीडिया में पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा। प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की बहसों में लगातार आरजेडी का प्रतिनिधित्व किया। ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे संगठन के एक अनुभवी और चर्चित चेहरे का साथ समाप्त हो गया है।
नाराजगी की वजह क्या रही
राजनीतिक हलकों में चर्चा रही कि पिछले कुछ समय से मृत्युंजय तिवारी की मीडिया में सक्रिय भूमिका सीमित कर दी गई थी। सूत्रों के अनुसार, इसी मुद्दे को लेकर वह असंतुष्ट थे और उन्होंने इसकी जानकारी पार्टी नेतृत्व तक भी पहुंचाई थी। हालांकि संगठन की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। स्वयं तिवारी भी पहले कह चुके हैं कि उन्हें आरजेडी में लालू प्रसाद यादव लेकर आए थे और वर्षों तक उन्होंने बिना किसी विवाद के अपनी जिम्मेदारियां निभाईं, लेकिन हाल के महीनों में परिस्थितियां बदल गईं।
भाजपा को मिल सकती है राजनीतिक मजबूती
मृत्युंजय तिवारी का भाजपा में शामिल होना ऐसे समय हो रहा है जब बिहार की राजनीति आगामी चुनावी गतिविधियों की ओर बढ़ रही है। पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर प्रस्तावित उपचुनाव से पहले उनका भाजपा में आना पार्टी के लिए संगठनात्मक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मीडिया और सार्वजनिक विमर्श में लंबे अनुभव के कारण उन्हें भविष्य में भाजपा की ओर से भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।