Defence Orders – पांच लाख करोड़ पार हुई नौ सरकारी रक्षा कंपनियों की ऑर्डर बुक
Defence Orders – भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र में घरेलू कंपनियों को मिल रहे लगातार नए ऑर्डर से सरकारी रक्षा उपक्रमों पर काम का दबाव बढ़ गया है। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पहली बार नौ सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनियों की कुल ऑर्डर बुक पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई है। इन कंपनियों के पास पहले से इतना काम मौजूद है कि कुछ उपक्रमों के लिए तत्काल नए ऑर्डर लेना मुश्किल हो गया है। बढ़ती मांग को देश में रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

एचएएल के पास सबसे बड़ा ऑर्डर बुक
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड सबसे अधिक ऑर्डर वाली सरकारी रक्षा कंपनी है। एचएएल के पास करीब 2,60,960 करोड़ रुपये के ऑर्डर हैं। इसमें वायुसेना और नौसेना के लिए विमानों का निर्माण, हेलीकॉप्टर तैयार करना तथा पहले से इस्तेमाल हो रहे विमानों के रखरखाव जैसे काम शामिल हैं।
कंपनी के मौजूदा काम का आकार इतना बड़ा है कि उपलब्ध ऑर्डरों को पूरा करने में करीब आठ से नौ वर्ष लगने का अनुमान है। इसका अर्थ यह है कि यदि उत्पादन क्षमता में विस्तार नहीं किया गया तो भविष्य में मिलने वाले नए बड़े ऑर्डरों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त संयंत्र या उत्पादन सुविधाओं की जरूरत पड़ सकती है। रक्षा क्षेत्र में विमानों और हेलीकॉप्टरों की घरेलू मांग बढ़ने के साथ एचएएल की भूमिका भी लगातार महत्वपूर्ण हो रही है।
बीईएल और बीईएमएल को भी बड़े ऑर्डर
ऑर्डर बुक के मामले में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड दूसरे स्थान पर है। बीईएल के पास लगभग 73,400 करोड़ रुपये के ऑर्डर हैं। कंपनी तीनों सेनाओं की जरूरतों के लिए रडार, रक्षा संचार प्रणालियों और मिसाइल प्रणालियों से संबंधित उपकरणों सहित विभिन्न सैन्य उत्पाद तैयार करती है।
भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड के पास भी करीब 16,395 करोड़ रुपये के ऑर्डर हैं। यह कंपनी सशस्त्र बलों के लिए अलग-अलग श्रेणियों के वाहनों और विशेष उपयोग वाले उपकरणों का निर्माण करती है। इन कंपनियों को मिल रहे ऑर्डर से संकेत मिलता है कि रक्षा क्षेत्र में सरकारी खरीद का एक बड़ा हिस्सा घरेलू उत्पादन क्षमता की ओर जा रहा है।
मिसाइल और विशेष धातुओं की मांग बढ़ी
भारत डायनामिक्स लिमिटेड के पास करीब 25,962 करोड़ रुपये के ऑर्डर बताए गए हैं। कंपनी निर्देशित मिसाइलों, पानी के भीतर इस्तेमाल होने वाली प्रणालियों और सैन्य साजोसामान से जुड़े उत्पादों का निर्माण करती है।
मिश्र धातु निगम लिमिटेड के पास करीब 2,440 करोड़ रुपये के ऑर्डर हैं। यह कंपनी नौसेना के पोतों और अन्य सैन्य जरूरतों के लिए विशेष किस्म की धातु तथा इस्पात तैयार करती है। रक्षा उत्पादन बढ़ने से इन कंपनियों के साथ-साथ उनसे जुड़े निजी उद्योगों और आपूर्ति श्रृंखला में काम करने वाली इकाइयों के लिए भी अवसर बढ़ने की संभावना है। घरेलू खरीद बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने में भी मदद मिल सकती है।
रक्षा खरीद में घरेलू कंपनियों को प्राथमिकता
सरकार की नीतियों में घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। केंद्र ने रक्षा खरीद के कुल बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा देश के भीतर खर्च करने का लक्ष्य तय किया है। इससे हर साल लगभग दो लाख करोड़ रुपये की रक्षा खरीद घरेलू बाजार से होने की संभावना बनती है।
रक्षा निर्यात में बढ़ोतरी भी उत्पादन बढ़ने का एक कारण है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। करीब 100 देशों को भारतीय रक्षा उपकरणों की बिक्री होने का दावा किया गया है। इसके अलावा सशस्त्र बलों के साथ अर्द्धसैनिक और पुलिस बलों के आधुनिकीकरण से भी घरेलू स्तर पर रक्षा उपकरणों की मांग बढ़ी है।
सरकारी कंपनियों की बढ़ती ऑर्डर बुक रक्षा उत्पादन में बढ़ती गतिविधियों को दर्शाती है। हालांकि, इस बढ़ते काम को समय पर पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता, तकनीकी संसाधनों और आपूर्ति श्रृंखला का विस्तार भी जरूरी होगा। आने वाले वर्षों में यही क्षमता तय करेगी कि बढ़ते ऑर्डरों को तेजी से तैयार उत्पादों में कितनी प्रभावी ढंग से बदला जा सकता है।