उत्तर प्रदेश

Electricity Bill – बिजली बिल में फिर दिखेगा नाम-पता, उपभोक्ताओं को मिली राहत

Electricity Bill से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव करते हुए बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। अगस्त में जारी किए जा रहे बिलों में अब फिर से उपभोक्ता का नाम और पूरा पता स्पष्ट रूप से दर्ज किया जा रहा है। पिछले महीने सॉफ्टवेयर में बदलाव के बाद बिलों पर नाम-पते के कुछ अक्षरों की जगह ‘एक्स’ दिखाई दे रहा था। इससे उन लोगों को परेशानी हुई, जो बिजली बिल का इस्तेमाल पते के प्रमाण के रूप में करते हैं।

electricity bill name address

सॉफ्टवेयर में बदलाव के बाद आई थी परेशानी

पावर कॉरपोरेशन ने पिछले महीने बिजली बिल तैयार करने वाले सॉफ्टवेयर में बदलाव किया था। इसके बाद कई उपभोक्ताओं के नाम और पते में बीच-बीच के अक्षर हटकर उनकी जगह ‘एक्स’ दिखाई देने लगा। यह व्यवस्था उपभोक्ताओं की पहचान संबंधी जानकारी को सार्वजनिक होने से बचाने के उद्देश्य से लागू किए जाने की बात सामने आई थी।

हालांकि, इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ा जो बिजली बिल को अपने पते के दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल करते हैं। आधार, पासपोर्ट, बैंक संबंधी काम, ड्राइविंग लाइसेंस और गैस कनेक्शन समेत कई जगहों पर बिजली बिल को पते के प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत किया जाता है। व्यवस्था में बदलाव के बाद उपभोक्ता संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई।

आपत्ति के बाद दोबारा बदला गया सॉफ्टवेयर

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने इस मामले को नियामक आयोग के सामने उठाया था। उन्होंने नाम और पता स्पष्ट रूप से दर्ज न होने की व्यवस्था को विद्युत वितरण संहिता-2003 की भावना के विपरीत बताया। परिषद की ओर से पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) के सामने भी इस मुद्दे पर आपत्ति दर्ज कराई गई।

इसके बाद पावर कॉरपोरेशन ने बिल तैयार करने वाले सॉफ्टवेयर में फिर बदलाव किया। अब उपभोक्ताओं को पहले की तरह नाम और पता स्पष्ट रूप से दर्ज वाले बिल मिलने लगे हैं। परिषद ने इसे उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सुधार बताया है।

आयोग की अनुमति को लेकर भी उठे सवाल

मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, नाम और पते के कुछ हिस्सों को ‘एक्स’ से बदलने वाली व्यवस्था लागू करने से पहले नियामक आयोग से अनुमति नहीं ली गई थी। कॉरपोरेशन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी को बिल के माध्यम से सार्वजनिक होने से रोकना था।

हालांकि, व्यवस्था लागू होने के बाद सामने आई व्यावहारिक दिक्कतों ने पूरे मामले को बदल दिया। बिल पर नाम और पता स्पष्ट नहीं होने से उपभोक्ताओं के लिए उसका उपयोग पते के प्रमाण के रूप में करना मुश्किल हो गया। शिकायतों और आपत्तियों के बाद पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी गई।

आरडीएसएस के खर्च पर भी उपभोक्ता परिषद ने मांगी समीक्षा

बिजली बिल के मुद्दे के साथ राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत खर्च की भी समीक्षा की मांग उठाई है। योजना में उत्तर प्रदेश के बिजली वितरण ढांचे और सेवाओं में सुधार के लिए 44,094 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। इसमें करीब 27 हजार करोड़ रुपये स्मार्ट मीटर लगाने पर खर्च किए जाने हैं।

बाकी राशि से विद्युत ढांचे के सुधार, छूटे हुए मजरों में विद्युतीकरण, नए ट्रांसफॉर्मर और एरियल बंच कंडक्टर समेत अन्य काम किए जाने हैं। परिषद का कहना है कि योजना के तहत काफी काम होने के बावजूद बिजली आपूर्ति, बिलिंग और शिकायतों के निस्तारण में अपेक्षित सुधार की समीक्षा जरूरी है।

चार वितरण कंपनियों के लिए हजारों करोड़ का प्रावधान

प्रस्तावित खर्च में मध्यांचल डिस्कॉम के लिए 13,539.33 करोड़ रुपये, पश्चिमांचल के लिए 12,695.42 करोड़ रुपये, पूर्वांचल के लिए 9,481.52 करोड़ रुपये और दक्षिणांचल के लिए 7,434.66 करोड़ रुपये रखे गए हैं। केस्को के लिए 943.33 करोड़ रुपये के खर्च का प्रस्ताव है।

परिषद के अनुसार, करीब एक करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं और बिजली ढांचे से जुड़े कई कार्य पूरे हो चुके हैं। इसके बावजूद बिल न मिलने, मीटर रिचार्ज के बाद कनेक्शन नहीं जुड़ने और शिकायतों के समय पर समाधान जैसी समस्याओं को लेकर सवाल बने हुए हैं। परिषद ने खर्च के साथ-साथ नतीजों की समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.