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FuelRates – वैश्विक तेल संकट के बीच भारत में स्थिर बने पेट्रोल-डीजल दाम

FuelRates – ईरान से जुड़े तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल महंगे हो गए हैं। इसके बावजूद भारत में फिलहाल ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसी वजह से देश में लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि जब वैश्विक बाजार में हालात अस्थिर हैं, तब भी भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर कैसे बने हुए हैं।

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दुनिया के कई देशों में बढ़ी ईंधन की कीमतें

अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, कई देशों में बीते महीनों के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ग्लोबल पेट्रोल प्राइस से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि दर्जनों देशों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बिक रहा है, जबकि कई देशों में यह कीमत 150 रुपये से भी अधिक पहुंच चुकी है। कुछ देशों में तो पेट्रोल 200 से 300 रुपये प्रति लीटर के बीच बिक रहा है।

भारत में फिलहाल पेट्रोल की औसत कीमत करीब 101 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है। यही कारण है कि वैश्विक संकट के बीच भारतीय बाजार की स्थिति पर लगातार चर्चा हो रही है। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ईंधन की खपत कम करने की अपील के बाद इस विषय को लेकर लोगों की जिज्ञासा और बढ़ गई है।

पड़ोसी देशों में भी दिखा असर

कच्चे तेल की महंगाई का असर भारत के पड़ोसी देशों में भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में करीब 55 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है, जबकि श्रीलंका में भी ईंधन महंगा हुआ है। म्यांमार और लाओस जैसे देशों में डीजल और पेट्रोल दोनों की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

यूएई, न्यूजीलैंड और अमेरिका जैसे देशों में भी ईंधन दरों में उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला है। यूरोप के कई देशों में भी पेट्रोल-डीजल महंगे हुए हैं। फ्रांस, बेल्जियम और ब्रिटेन जैसे देशों में कीमतों में लगातार बदलाव हो रहा है, जिससे आम लोगों की जेब पर असर पड़ा है।

कच्चे तेल में तेज उछाल से बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत कुछ ही समय में 71 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

ऊर्जा बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहते हैं, तो कई देशों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। पेट्रोल और डीजल की लागत बढ़ने से परिवहन, उद्योग और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ता है।

भारत में क्यों बनी हुई है स्थिरता

केंद्र सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद भारत के पास ऊर्जा भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश के पास करीब 60 दिनों का कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का स्टॉक उपलब्ध है। इसके अलावा एलपीजी का भी लगभग 45 दिनों का रोलिंग स्टॉक सुरक्षित रखा गया है।

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि इसी रणनीतिक तैयारी की वजह से फिलहाल भारतीय बाजार में ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में मदद मिली है। सरकार लगातार वैश्विक बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

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