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Gold Price – महंगाई के नरम आंकड़ों से संभला सोना, फिर पहुंचा 4,000 डॉलर के पार

Gold Price – अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों ने एक बार फिर मजबूती दिखाई है। एक दिन पहले 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसलने के बाद गुरुवार के कारोबार में सोना दोबारा इस महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर पहुंच गया। हाजिर सोना करीब 0.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,026.73 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। इसी दौरान चांदी में भी तेजी देखने को मिली और इसका भाव 57.86 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। वैश्विक बाजार की इस मजबूती का असर घरेलू वायदा बाजार पर भी दिखाई दिया, जहां एमसीएक्स पर सोने और चांदी दोनों के भाव में सुधार दर्ज किया गया।

gold price back above 4000

अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से मिला समर्थन

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका से आए मुद्रास्फीति के ताजा आंकड़े अनुमान से अपेक्षाकृत नरम रहने के बाद कीमती धातुओं में खरीदारी बढ़ी। इससे निवेशकों के बीच यह धारणा मजबूत हुई कि ब्याज दरों को लेकर पहले जितनी सख्ती की आशंका थी, उसमें कुछ नरमी आ सकती है। इसी वजह से अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई, जिसने सोने की कीमतों को सहारा दिया। हालांकि आय और उपभोक्ता खर्च से जुड़े आंकड़े अपेक्षा से बेहतर रहे, फिर भी बाजार का ध्यान महंगाई के संकेतों पर अधिक केंद्रित रहा।

डॉलर में नरमी से बढ़ी खरीदारी

सोने और चांदी की कीमतों को अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी का भी लाभ मिला। ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स लगातार तीन दिन की बढ़त के बाद गुरुवार को हल्का कमजोर पड़ा। डॉलर के नरम होने से अन्य देशों के खरीदारों के लिए डॉलर में मूल्य तय होने वाली धातुएं अपेक्षाकृत सस्ती हो जाती हैं। इसका सकारात्मक असर सोने के साथ-साथ चांदी, प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी अन्य कीमती धातुओं पर भी देखने को मिला।

फेड की नीति को लेकर बनी हुई है सतर्कता

हालांकि बाजार में आई इस रिकवरी के बावजूद निवेशकों की नजर अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी मौद्रिक नीति पर टिकी हुई है। फेडरल रिजर्व के कई नीति निर्माताओं ने हाल के दिनों में महंगाई पर नियंत्रण के लिए सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। यदि ब्याज दरें ऊंचे स्तर पर लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों जैसे सोने पर दबाव फिर बढ़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल हर आर्थिक आंकड़े पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाह

ओवरसी-चाइनीज बैंकिंग कॉर्प के रणनीतिकार क्रिस्टोफर वोंग का मानना है कि सोने में हालिया सुधार के बावजूद बाजार पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। उनके अनुसार, ऊंची वास्तविक यील्ड, फेड की सख्त नीति और 4,000 डॉलर के स्तर के आसपास बने मनोवैज्ञानिक दबाव के कारण निकट भविष्य में तेजी के दौरान मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।

लंबी तेजी के बाद बदला बाजार का रुख

पिछले कुछ वर्षों में सोने ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया था और इसकी कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी। केंद्रीय बैंकों, संस्थागत निवेशकों और खुदरा निवेशकों की लगातार खरीदारी से बाजार को समर्थन मिला था। हालांकि इस वर्ष की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने में 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिसे बाजार विशेषज्ञ व्यापक सुधार का संकेत मानते हैं। इसके बावजूद मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच निवेशकों की नजर अब भी कीमती धातुओं की अगली दिशा पर बनी हुई है।

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