बिज़नेस

InvestmentStocks – आईटी शेयरों में भारी गिरावट के बाद भी वैल्यूएशन पर उठे नए सवाल

InvestmentStocks – भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में इस साल की शुरुआत से लगातार कमजोरी देखने को मिली है। जनवरी से जून के बीच निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 31 प्रतिशत तक फिसल गया, जो पिछले दो दशकों में इसी अवधि की सबसे बड़ी गिरावटों में शामिल है। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, इससे अधिक कमजोरी केवल वर्ष 2001 में दर्ज की गई थी। लगातार बिकवाली के बीच यह सूचकांक तीन वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच चुका है, जबकि कई प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज हुई है।

indian it stocks valuation concerns

बड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव

बाजार में आई कमजोरी का असर देश की अग्रणी आईटी कंपनियों पर भी साफ दिखाई दिया है। इंफोसिस, टीसीएस और एचसीएल टेक जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर इस दौरान लगभग 30 से 38 प्रतिशत तक टूट चुके हैं। वहीं, केपीआईटी टेक के शेयरों में हाल की एक कारोबारी सत्र में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद कंपनी का शेयर पिछले एक वर्ष में 50 प्रतिशत से अधिक नीचे आ चुका है। इससे निवेशकों की चिंता और बढ़ी है।

गिरावट के बावजूद महंगे माने जा रहे वैल्यूएशन

शेयरों में आई तेज गिरावट के बाद भी कई विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय आईटी कंपनियों का वैल्यूएशन अब भी वैश्विक कंपनियों की तुलना में ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। मौजूदा अनुमान के अनुसार अधिकांश कंपनियां वित्त वर्ष 2028 की संभावित आय के लगभग 13 गुना मूल्यांकन पर कारोबार कर रही हैं। हालांकि यह उनके पिछले दस वर्षों के औसत स्तर से नीचे है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अभी भी इनका प्रीमियम काफी अधिक बना हुआ है।

वैश्विक कंपनियों से तुलना में बड़ा अंतर

गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय आईटी कंपनियों का अग्रिम प्राइस-टू-अर्निंग अनुपात अपने दीर्घकालिक औसत से छूट पर जरूर पहुंचा है, लेकिन एक्सेंचर, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी जैसी वैश्विक कंपनियों की तुलना में भारतीय कंपनियां कहीं अधिक मूल्यांकन पर कारोबार कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रीमियम करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जबकि ऐतिहासिक रूप से यह अंतर सामान्यतः 20 से 30 प्रतिशत के बीच रहा है। इसी वजह से विशेषज्ञों का मानना है कि केवल शेयरों में आई गिरावट को सस्ता होने का संकेत नहीं माना जा सकता।

आगे भी रह सकता है दबाव

मॉर्गन स्टेनली का आकलन है कि आईटी सेक्टर में वैल्यूएशन सामान्य होने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। ब्रोकरेज का कहना है कि पिछले चक्रों में जब बड़े आईटी शेयर निचले स्तर पर पहुंचे थे, तब उनका मूल्यांकन 11 से 13 गुना के दायरे में था। मौजूदा स्थिति को देखते हुए बाजार में अभी भी अतिरिक्त गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

कमजोर ग्रोथ बनी सबसे बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा गिरावट की सबसे प्रमुख वजह कंपनियों की धीमी आय वृद्धि है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 भी आईटी कंपनियों के लिए लगातार ऐसा वर्ष हो सकता है, जिसमें कारोबार की रफ्तार अपेक्षाकृत कमजोर बनी रहे। केपीआईटी टेक पहले ही संकेत दे चुकी है कि पहली तिमाही में अमेरिकी डॉलर के आधार पर उसकी आय पिछले वर्ष से लगभग 1 प्रतिशत कम रह सकती है और दूसरी तिमाही में भी स्थिति में बड़ा सुधार दिखाई नहीं दे सकता।

ब्रोकरेज फर्मों ने घटाए अनुमान

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इंफोसिस को भी अपने वित्त वर्ष 2027 के ऑर्गेनिक रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान में संशोधन करना पड़ सकता है, क्योंकि मांग में अपेक्षित तेजी नहीं दिख रही है। गोल्डमैन सैक्स ने पहले ही अपने ऑर्गेनिक ग्रोथ अनुमान को 3.2 प्रतिशत से घटाकर 2.4 प्रतिशत कर दिया है। दूसरी ओर, मॉर्गन स्टेनली ने भी टीसीएस और इंफोसिस दोनों के लिए राजस्व वृद्धि के अनुमान में उल्लेखनीय कटौती की है। रिपोर्ट के अनुसार इंफोसिस की अनुमानित वृद्धि में अधिग्रहण का बड़ा योगदान शामिल है, जबकि वास्तविक ऑर्गेनिक ग्रोथ करीब 1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में भी कमजोर मानी जा रही है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.