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RBIAction – नियमों के उल्लंघन पर तीन वित्तीय संस्थानों पर लगा जुर्माना

RBIAction – भारतीय रिजर्व बैंक ने नियमों के पालन में लापरवाही बरतने पर तीन वित्तीय संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की है। केंद्रीय बैंक ने सिटी यूनियन बैंक, मिंटिफी फिनसर्व और नेवा इन्वेस्टमेंट्स पर अलग-अलग राशि का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। आरबीआई की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इन संस्थानों ने बैंकिंग और नियामकीय दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया था।

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आरबीआई के अनुसार सिटी यूनियन बैंक पर 10.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं मिंटिफी फिनसर्व पर 3.10 लाख रुपये और नेवा इन्वेस्टमेंट्स पर 2.70 लाख रुपये का दंड तय किया गया है। यह कार्रवाई निरीक्षण और अनुपालन समीक्षा के दौरान सामने आई अनियमितताओं के आधार पर की गई है।

सिटी यूनियन बैंक पर क्यों हुई कार्रवाई

केंद्रीय बैंक के मुताबिक सिटी यूनियन बैंक ने कुछ कृषि ऋण खातों पर ऐसे शुल्क लगाए थे, जिनकी अनुमति नियमानुसार नहीं थी। आरबीआई ने कहा कि 25 हजार रुपये तक के कुछ कृषि कर्ज पर बैंक ने लोन संबंधी शुल्क वसूले। इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों से जुड़े जरूरी आंकड़े क्रेडिट सूचना कंपनियों को समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए।

सिटी यूनियन बैंक शेयर बाजार में सूचीबद्ध बैंक है। शुक्रवार को बैंक के शेयरों में गिरावट भी दर्ज की गई। कारोबारी सत्र के अंत में इसका शेयर करीब दो प्रतिशत टूटकर 248.60 रुपये पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में शेयर 247.75 रुपये से 254.50 रुपये के बीच बना रहा।

केवाईसी नियमों में चूक पर जुर्माना

मिंटिफी फिनसर्व पर कार्रवाई का कारण ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड से जुड़ी अनियमितता बताई गई है। आरबीआई के अनुसार कंपनी ने निर्धारित समय सीमा के भीतर कुछ ग्राहकों की जानकारी केंद्रीय केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री में अपलोड नहीं की थी। वित्तीय संस्थानों के लिए यह प्रक्रिया अनिवार्य मानी जाती है ताकि ग्राहकों की पहचान और लेनदेन की निगरानी पारदर्शी तरीके से हो सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में आरबीआई केवाईसी और अनुपालन नियमों को लेकर अधिक सख्त रुख अपना रहा है। डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन वित्तीय सेवाओं के बढ़ते उपयोग को देखते हुए नियामक संस्थाएं रिकॉर्ड प्रबंधन और सत्यापन प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दे रही हैं।

नेवा इन्वेस्टमेंट्स पर प्रबंधन बदलाव का मामला

नेवा इन्वेस्टमेंट्स पर जुर्माना कंपनी के प्रबंधन ढांचे में बदलाव से जुड़ा हुआ है। आरबीआई ने बताया कि कंपनी ने निदेशकों की नियुक्ति से पहले आवश्यक लिखित अनुमति नहीं ली थी। इसके कारण कंपनी के बोर्ड में 30 प्रतिशत से अधिक बदलाव हुआ, जिसे नियामकीय मंजूरी के बिना लागू किया गया।

केंद्रीय बैंक का कहना है कि वित्तीय संस्थानों में प्रबंधन स्तर पर बड़े बदलाव नियामकीय निगरानी के दायरे में आते हैं। ऐसे मामलों में पूर्व अनुमति लेना जरूरी होता है ताकि संस्थान की कार्यप्रणाली और निवेशकों के हित प्रभावित न हों।

हाल में एक सहकारी बैंक का लाइसेंस भी हुआ रद्द

इसी सप्ताह आरबीआई ने महाराष्ट्र के फलटन स्थित ‘द यशवंत सहकारी बैंक’ का लाइसेंस भी रद्द कर दिया था। केंद्रीय बैंक के अनुसार बैंक के पास पर्याप्त पूंजी और आय की संभावनाएं नहीं बची थीं। साथ ही बैंक कुछ नियामकीय प्रावधानों का पालन करने में भी विफल रहा।

आरबीआई ने कहा कि मौजूदा वित्तीय स्थिति में बैंक अपने जमाकर्ताओं की राशि लौटाने की स्थिति में नहीं था। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को बैंक बंद करने और परिसमापक नियुक्त करने का निर्देश दिया गया। जमाकर्ताओं को डीआईसीजीसी योजना के तहत अधिकतम पांच लाख रुपये तक की बीमा सुरक्षा मिलने की बात कही गई है।

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