MadhuriDixit – संघर्ष के दिनों में इस साधारण हालात में हुई थी माधुरी की फिल्म की शूटिंग
MadhuriDixit – आज हिंदी सिनेमा में माधुरी दीक्षित को सफल अभिनेत्रियों की सूची में गिना जाता है, लेकिन उनके शुरुआती दिनों का सफर काफी चुनौतीपूर्ण रहा था। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने कई ऐसी फिल्मों में काम किया, जिनका बजट बेहद सीमित था। हाल ही में अभिनेता शेखर सुमन ने एक पुराने इंटरव्यू में माधुरी दीक्षित के संघर्ष से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया, जिसने उस दौर की फिल्म इंडस्ट्री की सच्चाई को सामने ला दिया।

पहली मुलाकात में प्रभावित हुए थे शेखर सुमन
शेखर सुमन ने बताया कि फिल्म ‘संसार’ के बाद उन्हें निर्माता सरवन सिंह रहल की एक नई फिल्म का प्रस्ताव मिला था। निर्माता ने उन्हें बताया कि फिल्म में एक नई अभिनेत्री को लिया गया है, जिनका नाम माधुरी दीक्षित है। उस समय माधुरी इंडस्ट्री में बिल्कुल नई थीं और अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही थीं।
शेखर सुमन ने बताया कि वह निर्माता के साथ पहली बार माधुरी से मिलने उनके घर पहुंचे थे। उस दौरान माधुरी घर पर थीं और कुछ देर बाद उनसे मुलाकात हुई। अभिनेता के मुताबिक, पहली मुलाकात में ही वह उनकी सादगी और व्यक्तित्व से प्रभावित हो गए थे। उन्होंने कहा कि उसी समय उन्होंने फिल्म के लिए हामी भर दी थी।
कम बजट में पूरी हुई थी फिल्म की शूटिंग
शेखर सुमन ने बातचीत में बताया कि फिल्म का बजट काफी कम था, जिसके कारण शूटिंग के दौरान कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। निर्माता के पास स्टूडियो या बड़े सेट का खर्च उठाने की क्षमता नहीं थी, इसलिए कई हिस्सों की शूटिंग उनके घर पर ही की गई।
उन्होंने यह भी बताया कि उस समय माधुरी दीक्षित के पास रोजाना आने-जाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं होते थे। ऐसे में शेखर सुमन खुद अपने स्कूटर पर उन्हें शूटिंग के लिए लेने जाते और दिन खत्म होने के बाद वापस घर छोड़ते थे। उस दौर में कलाकारों का संघर्ष आज की तुलना में काफी अलग था और सीमित संसाधनों में ही काम पूरा किया जाता था।
मेकअप और कपड़ों की भी थी परेशानी
अभिनेता ने बताया कि फिल्म निर्माण के दौरान मेकअप आर्टिस्ट और कॉस्ट्यूम के लिए अलग बजट नहीं था। ऐसे में उनकी पत्नी अल्का सुमन खुद माधुरी का मेकअप किया करती थीं। कई दृश्यों में माधुरी ने अल्का के ही कपड़े पहने थे, क्योंकि नए कॉस्ट्यूम तैयार कराने के लिए पर्याप्त पैसे उपलब्ध नहीं थे।
शेखर सुमन के अनुसार, उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि संघर्ष के बीच काम कर रही यही अभिनेत्री आगे चलकर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे बड़ी स्टार्स में शामिल हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि माधुरी ने मेहनत और धैर्य के दम पर धीरे-धीरे अपना स्थान बनाया।
‘मानव हत्या’ में साथ आए थे दोनों कलाकार
शेखर सुमन और माधुरी दीक्षित ने फिल्म ‘मानव हत्या’ में साथ काम किया था। यह फिल्म साल 1986 में रिलीज हुई थी। उस समय माधुरी अपने करियर की शुरुआती फिल्मों में काम कर रही थीं और उन्हें बड़ी सफलता मिलने में अभी कुछ समय बाकी था।
फिल्म में गुलशन ग्रोवर, अरविंद देशपांडे, शरत सक्सेना, राजेश पुरी, टॉम आल्टर, सुधीर दलवी, प्रवीण कुमार और सुनील थापा जैसे कलाकार भी नजर आए थे। फिल्म का संगीत अनु मलिक ने तैयार किया था।
शुरुआती असफलताओं के बाद मिली पहचान
माधुरी दीक्षित ने 1984 में फिल्म ‘अबोध’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। शुरुआती दौर में उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर खास प्रदर्शन नहीं कर सकीं। हालांकि बाद में ‘तेजाब’, ‘दिल’, ‘बेटा’ और ‘हम आपके हैं कौन’ जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया।
आज भी उनके संघर्ष के शुरुआती किस्से फिल्म इंडस्ट्री में प्रेरणा के तौर पर देखे जाते हैं। सीमित संसाधनों से शुरू हुआ यह सफर आगे चलकर भारतीय सिनेमा की बड़ी सफलता की कहानियों में शामिल हो गया।