स्वास्थ्य

HealthAwareness – सर्वाइकल कैंसर रोकने की दिशा में दुनिया ने बढ़ाए बड़े कदम

HealthAwareness – उत्तर प्रदेश की 40 वर्षीय सुनीता ने हमेशा परिवार की जिम्मेदारियों को अपनी सेहत से ऊपर रखा। लगातार थकान, अनियमित रक्तस्राव और बढ़ते दर्द को उन्होंने सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज किया। जब हालत ज्यादा बिगड़ी और वह अस्पताल पहुंचीं, तब डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें सर्वाइकल कैंसर की एडवांस स्टेज है। कुछ महीनों तक इलाज चला, लेकिन बीमारी काफी फैल चुकी थी। आखिरकार वह अपने दो छोटे बच्चों को पीछे छोड़ इस दुनिया से चली गईं। भारत में ऐसी कई महिलाएं हर साल जागरूकता और समय पर जांच की कमी के कारण इस गंभीर बीमारी का शिकार बनती हैं।

global cervical cancer prevention awareness drive

समय रहते रोका जा सकता है यह कैंसर

विशेषज्ञों के अनुसार सर्वाइकल कैंसर उन चुनिंदा कैंसरों में शामिल है जिन्हें सही समय पर टीकाकरण और नियमित जांच के जरिए काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके बावजूद भारत समेत कई विकासशील देशों में महिलाएं शर्म, जानकारी की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं तक सीमित पहुंच के कारण जांच नहीं करा पातीं। यही वजह है कि यह बीमारी आज भी महिलाओं में मौत का बड़ा कारण बनी हुई है।

ऑस्ट्रेलिया बना दुनिया के लिए उदाहरण

दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया इस बीमारी को लगभग खत्म करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, वहां सर्वाइकल कैंसर के मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश बन सकता है जहां यह कैंसर बेहद दुर्लभ हो जाएगा।

ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली क्रिसी वाल्टर्स की कहानी भी इस बीमारी की गंभीरता को दिखाती है। मां बनने के कुछ ही महीनों बाद उन्हें एडवांस सर्वाइकल कैंसर का पता चला। वर्षों तक कठिन इलाज से गुजरने के बाद अब बीमारी उनके शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल चुकी है। हालांकि उनकी बेटी अब उस उम्र में पहुंच चुकी है जहां स्कूल स्तर पर HPV वैक्सीन दी जाती है, जिससे अगली पीढ़ी को इस बीमारी से बचाने की उम्मीद मजबूत हुई है।

HPV वायरस से जुड़ा है अधिकांश खतरा

डॉक्टर बताते हैं कि सर्वाइकल कैंसर के ज्यादातर मामलों की वजह Human Papillomavirus यानी HPV संक्रमण होता है। इस वायरस के कुछ प्रकार लंबे समय बाद कैंसर का रूप ले सकते हैं। इसी खतरे को रोकने के लिए वैज्ञानिकों ने HPV वैक्सीन विकसित की, जिसे ऑस्ट्रेलिया ने बड़े स्तर पर अपनाया।

साल 2007 में ऑस्ट्रेलिया ने राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया था। वहां स्कूलों में किशोर लड़के और लड़कियों दोनों को मुफ्त वैक्सीन दी जाती है। बाद में इसे लड़कों के लिए भी जरूरी माना गया, क्योंकि वे भी वायरस के वाहक हो सकते हैं।

जांच प्रणाली में बदलाव से मिला फायदा

टीकाकरण के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया ने स्क्रीनिंग व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया। पुराने Pap Smear टेस्ट की जगह अधिक प्रभावी HPV आधारित जांच शुरू की गई। यह जांच हर पांच साल में एक बार करानी होती है। खास बात यह रही कि महिलाओं को खुद सैंपल देने का विकल्प भी दिया गया, जिससे झिझक कम हुई और ज्यादा महिलाएं जांच के लिए आगे आईं।

अभी भी मौजूद हैं कई चुनौतियां

हालांकि सफलता के बावजूद चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों में अब भी इस कैंसर के मामले ज्यादा हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं तक सीमित पहुंच इसकी बड़ी वजह है। कोविड महामारी के बाद वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट और स्कूलों में कम उपस्थिति जैसी समस्याएं भी सामने आई हैं।

भारत में भी बढ़ रहा जागरूकता अभियान

भारत ने भी इस बीमारी से लड़ने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। देश में Cervavac नाम की स्वदेशी HPV वैक्सीन विकसित की गई है, जिससे टीकाकरण अधिक सुलभ और किफायती हुआ है। सरकार 9 से 14 वर्ष की किशोरियों के लिए टीकाकरण अभियान को बढ़ावा दे रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सही उम्र में वैक्सीन लगने और नियमित जांच कराने से सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी कम किया जा सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन भी दुनियाभर के देशों के साथ मिलकर इस बीमारी को नियंत्रित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर जागरूकता, टीकाकरण और जांच पर लगातार ध्यान दिया जाए तो आने वाले समय में लाखों महिलाओं की जान बचाई जा सकती है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.