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DefenseShield – यूएई में इजरायल की लेजर सुरक्षा तैनाती से बढ़ी हलचल

DefenseShield – मध्य पूर्व में बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा संबंधों को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल ने ईरान से संभावित मिसाइल और ड्रोन खतरों को देखते हुए अपनी उन्नत लेजर आधारित वायु रक्षा प्रणाली यूएई में तैनात की है।

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यह कदम दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के नए चरण के रूप में देखा जा रहा है। वर्ष 2020 में अब्राहम समझौते के बाद से दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं, लेकिन इस स्तर पर सैन्य तकनीक और कर्मियों की तैनाती को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यूएई को मिला बहुस्तरीय रक्षा कवच

रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायल ने यूएई को केवल एक रक्षा प्रणाली नहीं, बल्कि कई आधुनिक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा ‘आयरन बीम’ सिस्टम की हो रही है।

यह हाई-एनर्जी लेजर तकनीक पर आधारित रक्षा प्रणाली है, जिसे कम दूरी के रॉकेट और ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है। बताया जा रहा है कि यह कुछ ही सेकंड में लक्ष्य को निष्क्रिय करने में सक्षम है।

इसके अलावा इजरायल ने यूएई को अपनी चर्चित ‘आयरन डोम’ एयर डिफेंस प्रणाली भी उपलब्ध कराई है, जिसे दुनिया की प्रभावी रक्षा प्रणालियों में गिना जाता है।

ड्रोन निगरानी के लिए विशेष तकनीक

रक्षा सहयोग के तहत यूएई को आधुनिक निगरानी तकनीक भी दी गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार ‘स्पेक्ट्रो सिस्टम’ नामक तकनीक छोटे और तेज ड्रोन की पहचान करने में सक्षम है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में छोटे आकार के ड्रोन युद्ध रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं, जिन्हें पारंपरिक रडार से पकड़ना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में नई निगरानी तकनीक यूएई की सुरक्षा क्षमता को मजबूत कर सकती है।

इजरायली सैन्य कर्मियों की मौजूदगी

इस पूरे समझौते का सबसे अहम पहलू इजरायली सैन्य कर्मियों की तैनाती मानी जा रही है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि रक्षा प्रणालियों को संचालित करने और तकनीकी सहायता के लिए इजरायल ने अपने सैनिकों को भी यूएई भेजा है।

विश्लेषकों के मुताबिक किसी अरब देश में इस प्रकार की सैन्य मौजूदगी दोनों देशों के संबंधों में बड़े बदलाव का संकेत देती है। साथ ही इजरायल द्वारा रियल टाइम खुफिया जानकारी साझा किए जाने की बात भी सामने आई है।

क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ी सक्रियता

हाल के महीनों में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार यूएई पर ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा बढ़ने के बाद सुरक्षा तैयारियों को तेजी से मजबूत किया गया।

बताया जा रहा है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कुछ ऐसे रक्षा उपकरण भी यूएई भेजे गए जो अभी परीक्षण या शुरुआती उपयोग के चरण में थे। इसका उद्देश्य संभावित हमलों के खिलाफ त्वरित सुरक्षा तैयार करना था।

रणनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा कदम

मध्य पूर्व मामलों के जानकार इस कदम को केवल सैन्य सहयोग नहीं, बल्कि बड़ा रणनीतिक संदेश मान रहे हैं। दशकों तक अरब देशों और इजरायल के संबंध तनावपूर्ण रहे, लेकिन अब क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के कारण नई साझेदारियां उभरती दिखाई दे रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि कम लागत में ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकने की क्षमता भविष्य की सुरक्षा रणनीतियों में अहम भूमिका निभाएगी। लेजर आधारित तकनीक को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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