उत्तर प्रदेश

RevenueCase – वरासत में नाम की गलती से बदल गया जमीन का अधिकार

RevenueCase – उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में राजस्व अभिलेखों में हुई एक बड़ी चूक ने जमीन के उत्तराधिकार को लेकर विवाद खड़ा कर दिया है। तहसील सदर क्षेत्र में एक व्यक्ति के नाम को महिला समझकर गलत तरीके से नामांतरण कर दिया गया, जिसके चलते पैतृक संपत्ति का हिस्सा दूसरे वारिसों के नाम दर्ज हो गया। मामला सामने आने के बाद पीड़ित पक्ष ने अब तहसीलदार न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई है।

revenuecase land record name error dispute

नाम की गड़बड़ी से बदला उत्तराधिकार

गोरखपुर के बाघागाड़ा इलाके के निवासी गिरिजा शंकर ने आरोप लगाया है कि उनके पिता रामजीत उर्फ सीता की मृत्यु के बाद वरासत प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही हुई। राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने “सीता” नाम देखकर उन्हें महिला मान लिया और रिकॉर्ड में उन्हें उनके पिता जत्तन की पत्नी के रूप में दर्ज कर दिया।

असल में रामजीत, जत्तन के पुत्र थे। लेकिन इस त्रुटि के कारण जमीन का बंटवारा गलत तरीके से दर्ज हो गया और संपत्ति में अन्य पट्टीदारों के नाम भी शामिल हो गए। गिरिजा शंकर का कहना है कि उनके पिता की संपत्ति सीधे उनके नाम दर्ज होनी चाहिए थी, लेकिन गलती के कारण उनका हिस्सा प्रभावित हुआ।

परिवार रजिस्टर में नहीं मिला ‘सीता’ नाम

मामले में सबसे अहम बात यह सामने आई कि परिवार रजिस्टर और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में “सीता” नाम दर्ज ही नहीं है। जानकारी के मुताबिक, कंप्यूटर में डेटा एंट्री के दौरान पहले “रामजीत” की जगह गलती से “जीता” लिखा गया और बाद में यह “सीता” में बदल गया। इसी त्रुटिपूर्ण नाम के आधार पर पूरी वरासत प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई।

गिरिजा शंकर ने बताया कि उनके दादा जत्तन के तीन बेटे थे — रामजीत, रामरूप और राम शिव। जबकि जत्तन की पत्नी धनेश्वरी देवी का निधन पहले ही हो चुका था और इसका उल्लेख परिवार रजिस्टर में मौजूद है। इसके बावजूद रिकॉर्ड तैयार करते समय पर्याप्त जांच नहीं की गई।

अधिवक्ता ने उठाए सवाल

मामले में पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि दस्तावेजों की सही तरीके से जांच की जाती तो ऐसी गलती संभव नहीं थी। उन्होंने कहा कि आवेदन के साथ परिवार रजिस्टर, आधार कार्ड और अन्य प्रमाणपत्र लगाए गए थे, जिनमें स्पष्ट रूप से रिश्तों का विवरण मौजूद था।

अधिवक्ता के अनुसार, सिर्फ नाम के आधार पर किसी व्यक्ति को महिला मान लेना और उसे पत्नी के रूप में दर्ज कर देना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने मांग की कि भविष्य में ऐसी त्रुटियों को रोकने के लिए जांच प्रक्रिया को और सख्त बनाया जाए।

तहसील प्रशासन ने लिया संज्ञान

मामला सामने आने के बाद तहसील प्रशासन ने भी इसे गंभीरता से लिया है। तहसीलदार सदर ज्ञान प्रताप सिंह ने बताया कि गलत नामांतरण की शिकायत प्राप्त हो चुकी है और इस संबंध में वाद दर्ज कर लिया गया है।

उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत मामले की जांच की जाएगी और आवश्यक संशोधन आदेश जारी किए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि करीब 30 दिनों के भीतर रिकॉर्ड सुधारने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

ग्रामीणों में बढ़ी चिंता

इस घटना के बाद इलाके में जमीन और वरासत से जुड़े रिकॉर्ड की शुद्धता को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटी सी डेटा एंट्री की गलती भी भविष्य में बड़े कानूनी विवाद का कारण बन सकती है। कई लोग अब अपने परिवार और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की दोबारा जांच कराने की तैयारी कर रहे हैं।

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