SleepHealth – जानें क्यों जरूरी माना जाता है सही समय पर सोना…
SleepHealth – अच्छी सेहत के लिए संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और नियमित व्यायाम जितने महत्वपूर्ण हैं, उतनी ही अहम भूमिका नींद भी निभाती है। नींद के दौरान शरीर खुद को पुनर्स्थापित करता है और मस्तिष्क दिनभर की सूचनाओं को व्यवस्थित करने का काम करता है। आमतौर पर विशेषज्ञ वयस्कों को प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की नींद लेने की सलाह देते हैं, लेकिन हालिया चर्चा इस बात पर भी जोर देती है कि केवल नींद की अवधि ही नहीं, बल्कि उसका समय भी महत्वपूर्ण होता है।

स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अबिनाश जोशी के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति रोजाना पर्याप्त घंटे सो भी रहा है, तब भी देर रात सोने की आदत उसके स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। उनका कहना है कि शरीर की जैविक घड़ी एक निश्चित समय चक्र पर काम करती है, जिसे नजरअंदाज करना लंबे समय में समस्याएं पैदा कर सकता है।
शरीर की जैविक घड़ी कैसे करती है काम
विशेषज्ञों के मुताबिक मानव शरीर में एक प्राकृतिक समय प्रणाली होती है, जिसे सर्कैडियन रिदम कहा जाता है। यह शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों जैसे हार्मोन का संतुलन, शरीर का तापमान, ऊर्जा स्तर और कोशिकाओं की मरम्मत को नियंत्रित करती है।
अधिकांश लोगों के लिए यह जैविक घड़ी रात के समय आराम और सुबह सक्रियता के लिए तैयार होती है। यदि कोई व्यक्ति लगातार देर रात सोता है और सुबह देर से उठता है, तो शरीर की प्राकृतिक लय प्रभावित हो सकती है, भले ही कुल नींद के घंटे पर्याप्त हों।
देर रात सोने की आदत से जुड़े संभावित जोखिम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक अनियमित समय पर सोना कई स्वास्थ्य चुनौतियों को बढ़ा सकता है। कुछ शोधों में यह पाया गया है कि खराब स्लीप शेड्यूल का संबंध हृदय स्वास्थ्य, रक्तचाप और मेटाबॉलिक समस्याओं से हो सकता है।
इसके अलावा, नींद का समय बिगड़ने पर इंसुलिन की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे भविष्य में रक्त शर्करा नियंत्रण से जुड़ी परेशानियों का जोखिम बढ़ सकता है। मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ सकता है और तनाव, चिंता या मूड संबंधी समस्याएं अधिक देखने को मिल सकती हैं।
स्लीप शेड्यूल को बेहतर बनाने के उपाय
विशेषज्ञों का सुझाव है कि सुबह उठने के बाद कुछ समय प्राकृतिक धूप में बिताना शरीर की जैविक घड़ी को संतुलित करने में मदद कर सकता है। नियमित रूप से सुबह की धूप लेने से शरीर को दिन और रात के चक्र को पहचानने में आसानी होती है।
इसके साथ ही सोने से कुछ घंटे पहले तेज रोशनी और स्क्रीन के उपयोग को सीमित करना भी लाभकारी माना जाता है। हल्की रोशनी का वातावरण शरीर को आराम की स्थिति में लाने में मदद कर सकता है।
नियमित दिनचर्या का महत्व
अच्छी नींद के लिए रोजाना एक निश्चित समय पर सोना और जागना जरूरी माना जाता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सप्ताहांत में भी इस समय-सारिणी को यथासंभव बनाए रखा जाए, ताकि शरीर की लय बनी रहे।
यदि रात में नींद आने में कठिनाई होती है, तो सोने से पहले शांत गतिविधियां जैसे किताब पढ़ना, ध्यान लगाना या हल्का संगीत सुनना मददगार हो सकता है। कैफीनयुक्त पेय पदार्थों का सेवन भी रात के समय कम करने की सलाह दी जाती है।
केवल घंटों पर नहीं, समय पर भी दें ध्यान
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली के लिए पर्याप्त नींद लेना आवश्यक है, लेकिन नींद का सही समय भी उतना ही महत्वपूर्ण है। शरीर की प्राकृतिक घड़ी के अनुरूप सोने और जागने की आदत बेहतर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में योगदान दे सकती है।