El Nino – संयुक्त राष्ट्र ने दी चेतावनी, बढ़ सकता है वैश्विक तापमान
El Nino – संयुक्त राष्ट्र से जुड़े मौसम विशेषज्ञों ने दुनिया के लिए एक नई जलवायु चुनौती को लेकर चेतावनी जारी की है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, आने वाले हफ्तों में अल नीनो की स्थिति और मजबूत हो सकती है, जिसका असर वैश्विक मौसम पैटर्न पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना पहले से बढ़ते तापमान के बीच अतिरिक्त गर्मी का कारण बन सकती है और कई क्षेत्रों में चरम मौसम की परिस्थितियां पैदा कर सकती है।

वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा जारी ताजा आकलनों के अनुसार, वर्ष 2026 के शेष महीनों में अल नीनो के प्रभाव में वृद्धि होने की संभावना है। कुछ मौसम एजेंसियों ने इसे हाल के दशकों की सबसे शक्तिशाली घटनाओं में से एक बताया है।
भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है असर
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो का प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रूप में दिखाई देता है। भारत में इसका असर मानसून की गतिविधियों पर पड़ सकता है, जिससे सामान्य वर्षा प्रभावित होने की आशंका रहती है। वहीं अफ्रीका के कुछ हिस्सों में वर्षा की कमी और सूखे जैसी स्थितियां बन सकती हैं।
इसके विपरीत दक्षिण अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इतिहास बताता है कि ऐसे मौसमीय बदलाव कृषि उत्पादन को प्रभावित करते हैं, जिससे खाद्य आपूर्ति और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
तापमान में और वृद्धि की आशंका
विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो वाले वर्षों में वैश्विक औसत तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जाता है। वैज्ञानिक आकलनों में पाया गया है कि इस घटना के दौरान पृथ्वी का तापमान अतिरिक्त रूप से बढ़ सकता है। इसी वजह से कई जलवायु शोधकर्ता आने वाले वर्षों में नए तापमान रिकॉर्ड बनने की संभावना जता रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन के मौजूदा दौर में अल नीनो जैसी घटनाएं और अधिक गंभीर प्रभाव छोड़ सकती हैं, क्योंकि वैश्विक तापमान पहले से ही ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।
कैसे विकसित होता है अल नीनो
अल नीनो प्रशांत महासागर में होने वाली एक प्राकृतिक महासागरीय और वायुमंडलीय प्रक्रिया है। यह तब विकसित होती है जब समुद्री हवाओं के सामान्य प्रवाह में बदलाव आता है और महासागर के मध्य तथा पूर्वी हिस्सों में पानी का तापमान बढ़ने लगता है।
पिछले कुछ महीनों के दौरान वैज्ञानिकों ने मध्य प्रशांत क्षेत्र में तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की है। शुरुआत में जहां समुद्री परिस्थितियां सामान्य थीं, वहीं बाद में गर्म पानी का विस्तार तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई दिया। यही बदलाव अल नीनो के विकसित होने का प्रमुख संकेत माना जाता है।
वैज्ञानिक लगातार रख रहे हैं नजर
मौसम विशेषज्ञ इस स्थिति की निगरानी के लिए उपग्रहों, समुद्री सेंसरों और अन्य आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं। महासागर की सतह के नीचे जमा गर्म पानी की बड़ी मात्रा को भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्र के भीतर मौजूद यह गर्मी धीरे-धीरे सतह तक पहुंच सकती है और फिर वातावरण को प्रभावित कर सकती है।
इसी वजह से दुनिया भर की मौसम एजेंसियां लगातार नए आंकड़ों का विश्लेषण कर रही हैं ताकि संभावित प्रभावों का बेहतर अनुमान लगाया जा सके।
‘सुपर अल नीनो’ की आशंका पर चर्चा
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्र के एक बड़े हिस्से का तापमान लंबे समय तक सामान्य स्तर से काफी ऊपर बना रहता है, तो स्थिति अत्यधिक प्रभावशाली रूप ले सकती है। इसी प्रकार की घटनाओं को आमतौर पर ‘सुपर अल नीनो’ कहा जाता है।
ऐसी परिस्थितियों में मौसम संबंधी प्रभाव अधिक व्यापक और तीव्र हो सकते हैं। हालांकि वैज्ञानिक यह भी स्पष्ट करते हैं कि प्रत्येक अल नीनो की प्रकृति अलग होती है और उसके प्रभाव क्षेत्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी बढ़ती जलवायु चुनौतियों को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि अल नीनो मजबूत होता है तो यह पहले से मौजूद वैश्विक तापमान वृद्धि के प्रभावों को और गंभीर बना सकता है। ऐसे में देशों को मौसम संबंधी जोखिमों के प्रति सतर्क रहने और आवश्यक तैयारियां करने की जरूरत होगी।