Brij Bhushan – अदालत के फैसले के बाद भाजपा ने उठाई जवाबदेही की मांग
Brij Bhushan शरण सिंह से जुड़े महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अदालत ने पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ अध्यक्ष को मामले में बरी कर दिया। फैसले के बाद भाजपा ने आरोप लगाया कि इस प्रकरण के जरिए पार्टी और उसके नेता की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। पार्टी नेताओं ने अब उन लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है, जिन पर अदालत में झूठे या मनगढ़ंत आरोप लगाने का आरोप लगाया गया।

अदालत ने बयानों में आए बदलाव का किया उल्लेख
राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयानों और उपलब्ध सामग्री पर विचार किया। अदालत की टिप्पणियों में दो महिला पहलवानों के बयानों में बदलाव का उल्लेख किया गया। फैसले में कहा गया कि मामले की जांच और सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बन पाया।
अदालत ने मामले से जुड़े कुछ बयानों और परिस्थितियों को भी अपने आदेश में विस्तार से देखा। फैसले के बाद भाजपा नेताओं ने अदालत की टिप्पणियों को अपने आरोपों के समर्थन में पेश किया और कहा कि अब उन लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठना चाहिए, जिन्होंने इस मामले को सार्वजनिक और राजनीतिक मुद्दा बनाया था।
भाजपा ने मांगी झूठे आरोपों पर कार्रवाई
भाजपा के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने फैसले के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाकर लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से उसकी प्रतिष्ठा प्रभावित करना और बाद में अदालत के फैसले के बाद मामले को भूल जाना उचित नहीं है।
मालवीय ने अपने बयान में आरोप लगाया कि इस प्रकरण में आरोपों को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि यदि झूठे आरोप लगाने वालों की जवाबदेही तय नहीं होगी तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति की आशंका बनी रहेगी। भाजपा ने इसी आधार पर मामले से जुड़े लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग उठाई है।
2023 में जंतर-मंतर पर हुआ था बड़ा प्रदर्शन
यह मामला वर्ष 2023 में राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आया, जब विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया समेत कई प्रमुख पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने तत्कालीन डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बृजभूषण सिंह पर महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उन्होंने गिरफ्तारी के साथ-साथ कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद से उन्हें हटाने की मांग भी की थी।
पहलवानों ने प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अप्रैल 2023 में मामले से संबंधित दो प्राथमिकी दर्ज की थीं। जांच आगे बढ़ने के बाद यह मामला दिल्ली की अदालत में पहुंचा और लंबे समय तक इसकी सुनवाई चली।
मामले का राजनीतिक असर भी रहा
विवाद का असर राजनीति पर भी दिखाई दिया। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कैसरगंज सीट से बृजभूषण सिंह को उम्मीदवार नहीं बनाया। पार्टी ने उनकी जगह उनके बेटे करन भूषण सिंह को चुनाव मैदान में उतारा। करन भूषण सिंह ने बाद में यह चुनाव जीत लिया।
अदालत के ताजा फैसले ने पुराने विवाद को फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। भाजपा इसे अपने नेता के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर मिली कानूनी राहत के तौर पर देख रही है, जबकि पूरे प्रकरण को लेकर पहले हुए विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक बहस की पृष्ठभूमि भी अब फिर सामने आ रही है। मामले में अदालत की टिप्पणियों और फैसले के आधार पर आगे होने वाली राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर भी नजर रहेगी।