राष्ट्रीय

Mamata Banerjee – हलीशहर में विरोध पर सियासी घमासान, बीजेपी पर उठे सवाल

Mamata Banerjee के हलीशहर दौरे के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी को जन्म दे दिया है। तृणमूल कांग्रेस के एक मृत कार्यकर्ता के परिवार से मुलाकात करने जा रहीं बनर्जी के काफिले को प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर घेर लिया। इस दौरान नारेबाजी के साथ उनके वाहन पर कीचड़, जूते और पत्थर फेंके जाने के आरोप भी सामने आए। घटना के बाद सत्तारूढ़ और विपक्षी खेमे के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

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हलीशहर जाते समय काफिले का हुआ विरोध

उत्तर 24 परगना जिले के हलीशहर में बनर्जी उस तृणमूल कार्यकर्ता के परिजनों से मिलने जा रही थीं, जिसकी कथित तौर पर पुलिस हिरासत में मौत हुई थी। रास्ते में प्रदर्शनकारियों ने उनके वाहन को रोकने की कोशिश की और उनके खिलाफ नारे लगाए। घटना के वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों से जुड़े दावों को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, हालांकि पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।

विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस विरोध को आम लोगों के गुस्से का परिणाम बताया। उन्होंने दावा किया कि मौके पर भाजपा का कोई कार्यकर्ता मौजूद नहीं था और न ही वहां पार्टी का झंडा दिखाई दिया। अधिकारी ने बनर्जी पर तीखी राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जनता की नाराजगी का सामना उन्हें स्वयं करना पड़ रहा है। उन्होंने इस घटना को लेकर भाजपा की किसी भूमिका से इनकार किया।

शुभेंदु अधिकारी ने उठाए आरजी कर मामले पर सवाल

अधिकारी ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल मामले की पीड़िता को लेकर भी बनर्जी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बनर्जी को पीड़िता के परिवार से मिलकर अपनी पिछली गलतियों के लिए माफी मांगनी चाहिए थी। अधिकारी ने पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ का उल्लेख करते हुए कहा कि बनर्जी यदि उनसे मिलने जातीं तो यह राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण संदेश होता।

आरजी कर मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहले भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होती रही है। ऐसे में हलीशहर की घटना के बाद अधिकारी की टिप्पणी ने पुराने विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, इस मामले में अलग-अलग राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं उनके अपने राजनीतिक रुख के अनुरूप सामने आई हैं।

कांग्रेस ने काफिले पर हमले की निंदा की

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने बनर्जी के काफिले के विरोध की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक टकराव का माहौल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। गहलोत ने इस घटना को बदले की राजनीति से जोड़ते हुए भाजपा पर राज्य में भय और अराजकता का वातावरण बनाने का आरोप लगाया।

कांग्रेस की ओर से सामने आई प्रतिक्रिया भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक संघर्ष के बीच आई है। पार्टी ने काफिले पर हुए कथित हमले को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया। हालांकि, घटना को लेकर राजनीतिक दलों के आरोपों के बीच वास्तविक जिम्मेदारी तय करने के लिए आधिकारिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का महत्व बना हुआ है।

ममता बनर्जी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

बनर्जी ने घटना के लिए भाजपा समर्थकों को जिम्मेदार ठहराने का दावा किया और आरोप लगाया कि मृत तृणमूल कार्यकर्ता के परिवार को भी कथित तौर पर धमकाया जा रहा था। उन्होंने राज्य प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके खिलाफ राजनीतिक दबाव में कार्रवाई की जा रही है।

हलीशहर की घटना ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा, विरोध प्रदर्शन और प्रशासन की भूमिका को लेकर बहस फिर तेज कर दी है। एक ओर विपक्ष घटना को जनता के असंतोष से जोड़ रहा है, वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीतिक विरोध और दबाव की कार्रवाई बता रही है। ऐसे में आगे की जांच और आधिकारिक तौर पर सामने आने वाले तथ्यों से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे वास्तव में कौन जिम्मेदार था और विरोध प्रदर्शन किस तरह संगठित हुआ।

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