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Controversy – सायोनी घोष पर विवादित बयान से गरमाई सियासत, संजय सिंह का तीखा हमला

Controversy – तृणमूल कांग्रेस सांसद सायोनी घोष को लेकर दिए गए एक विवादित बयान ने राजनीतिक माहौल को अचानक गर्म कर दिया है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भाजपा नेता की ओर से कथित तौर पर सायोनी घोष का सिर काटने पर इनाम घोषित किए जाने को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पदयात्रा कर रहे संजय सिंह ने इस बयान को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा।

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भाजपा नेता के बयान पर बढ़ा विवाद

दरअसल, बुलंदशहर जिले की सिकंदराबाद नगर पालिका के अध्यक्ष प्रदीप दीक्षित ने कथित रूप से कहा था कि जो व्यक्ति सायोनी घोष का सिर काटकर लाएगा, उसे एक करोड़ रुपये का इनाम दिया जाएगा। यह बयान उस पुराने विवाद से जुड़ा बताया गया जिसमें सायोनी घोष पर भगवान शिव के अपमान का आरोप लगाया गया था। बयान सामने आने के बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

हालांकि विवाद बढ़ने के बाद प्रदीप दीक्षित ने अपने बयान पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि वह किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करते। उनका कहना था कि धार्मिक भावनाएं आहत होने के कारण उन्होंने भावुक होकर ऐसा बयान दिया था। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि संबंधित वीडियो और पोस्ट कई साल पुराने हैं और इस मामले में सायोनी घोष पहले ही सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त कर चुकी हैं।

संजय सिंह ने भाजपा पर साधा निशाना

इस पूरे मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय सिंह ने भाजपा नेतृत्व से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि किसी महिला सांसद के खिलाफ इस तरह की भाषा लोकतंत्र और महिला सम्मान दोनों के खिलाफ है। उन्होंने मंच से कहा कि देश को डर और नफरत की राजनीति की ओर नहीं धकेला जा सकता।

संजय सिंह ने भाजपा के महिला सुरक्षा और महिला सम्मान से जुड़े अभियानों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि अगर एक निर्वाचित महिला सांसद के खिलाफ खुलेआम हिंसक बयान दिए जाते हैं, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयानों से राजनीतिक असहिष्णुता को बढ़ावा मिलता है।

सायोनी घोष पहले भी रही हैं विवादों में

जादवपुर से लोकसभा सांसद सायोनी घोष बंगाली फिल्म इंडस्ट्री का जाना-पहचाना चेहरा रही हैं। राजनीति में आने के बाद भी वह लगातार चर्चाओं में बनी रहीं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान एक मंच से उनके द्वारा गाया गया गीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। इसको लेकर राजनीतिक बहस भी छिड़ गई थी और विपक्ष ने इसे चुनावी ध्रुवीकरण से जोड़कर देखा था।

इसी बीच उनका एक पुराना सोशल मीडिया पोस्ट भी दोबारा वायरल होने लगा, जिसमें भगवान शिव से जुड़ा एक कार्टून साझा किया गया था। इस पोस्ट को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। सायोनी घोष ने इस मामले में पहले स्पष्ट किया था कि वह उस तस्वीर की निर्माता नहीं थीं और अगर किसी की भावनाएं आहत हुईं तो उन्होंने इसके लिए माफी भी मांगी थी।

राजनीतिक बयानबाजी से बढ़ी हलचल

इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। विपक्षी दल भाजपा नेताओं की भाषा और राजनीतिक आचरण पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि भाजपा की ओर से भी इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी माहौल में तनाव और ध्रुवीकरण को बढ़ा सकते हैं।

राजनीतिक गलियारों में अब यह बहस तेज हो गई है कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं की भाषा की मर्यादा किस हद तक जरूरी है और क्या इस तरह के बयान लोकतांत्रिक संवाद को प्रभावित करते हैं।

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