DefenseTech – भारत का एआई युद्धक विमान ‘काल भैरव’ जल्द होगा तैयार
DefenseTech – भारत रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि की ओर बढ़ रहा है। देश का पहला कृत्रिम मेधा आधारित युद्धक विमान ‘काल भैरव’ अब निर्माण चरण में प्रवेश करने जा रहा है। इस परियोजना पर भारतीय कंपनी FWDA और पुर्तगाल की एयरोस्पेस फर्म SKETCHPIXEL मिलकर काम करेंगी। दोनों कंपनियों के बीच हुए समझौते के तहत विमान के डिजाइन, सिमुलेशन और ऑटोनोमस सिस्टम को विकसित किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, पुर्तगाल की कंपनी उन्नत फाइटर जेट सिमुलेशन तकनीक के लिए जानी जाती है और वह इस परियोजना में तकनीकी सहयोग देगी। वहीं भारतीय कंपनी विमान के एआई सिस्टम, एयरफ्रेम डिजाइन और स्वायत्त संचालन तकनीक को विकसित करेगी। इसे भारत की रक्षा क्षमताओं में बड़ा कदम माना जा रहा है।
आधुनिक युद्ध में बढ़ रही एआई तकनीक की भूमिका
दुनियाभर में सैन्य रणनीतियां तेजी से बदल रही हैं। हाल के वर्षों में ड्रोन, एआई आधारित निगरानी और स्वचालित हथियार प्रणालियों का उपयोग बढ़ा है। यूक्रेन-रूस संघर्ष से लेकर पश्चिम एशिया के कई सैन्य अभियानों तक, ड्रोन तकनीक की अहम भूमिका देखने को मिली है।
भारत भी अब भविष्य की युद्ध प्रणाली को ध्यान में रखते हुए नई तकनीकों पर निवेश बढ़ा रहा है। रक्षा मंत्रालय पहले ही लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले MALE ड्रोन खरीदने की योजना पर विचार कर रहा है। ऐसे माहौल में ‘काल भैरव’ परियोजना को भारतीय रक्षा क्षेत्र की रणनीतिक जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है।
विमान की रेंज और उड़ान क्षमता
‘काल भैरव’ को लंबी दूरी और लंबे समय तक मिशन संचालन के लिए डिजाइन किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विमान लगभग 3000 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकेगा और लगातार 30 घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम होगा।
इसमें एआई आधारित लक्ष्य पहचान और मिशन कोऑर्डिनेशन सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे यह बिना मानवीय हस्तक्षेप के कई कार्य कर सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी तकनीक युद्ध के दौरान प्रतिक्रिया समय को कम करने और सटीक हमलों में मददगार हो सकती है।
युद्धक उपयोग के लिए खास डिजाइन
विमान की पेलोड क्षमता करीब 91 किलोग्राम बताई जा रही है। सामान्य परिस्थितियों में यह 15 हजार फीट की ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ान भर सकता है। युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी इसकी परिचालन क्षमता बनाए रखने का दावा किया गया है।
इसके अलावा इसकी क्रूज स्पीड और स्वॉर्म तकनीक आधारित संचालन प्रणाली इसे पारंपरिक ड्रोन से अलग बनाती है। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में छोटे लेकिन स्मार्ट स्वायत्त विमान बड़े और महंगे युद्धक प्लेटफॉर्म की जगह ले सकते हैं।
विदेशी सिस्टम की तुलना में कम लागत
इस परियोजना की एक बड़ी खासियत इसकी अपेक्षाकृत कम लागत मानी जा रही है। अमेरिका के MQ-9 Reaper जैसे आधुनिक ड्रोन सिस्टम की कीमत हजारों करोड़ रुपये तक पहुंचती है। वहीं ‘काल भैरव’ को अपेक्षाकृत कम लागत में तैयार किए जाने की योजना है।
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारत इस तरह के कई एआई आधारित विमान विकसित करने में सफल होता है तो इससे सामरिक स्तर पर बड़ी बढ़त मिल सकती है। खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और सामूहिक मिशन संचालन में इसका उपयोग अहम हो सकता है।
आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण को मिलेगा बढ़ावा
‘काल भैरव’ परियोजना को भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति से भी जोड़ा जा रहा है। इस विमान के निर्माण में भारतीय सप्लाई चेन और घरेलू तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। इससे देश में उन्नत रक्षा उत्पादन का दायरा बढ़ने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे प्लेटफॉर्म का निर्यात भी भारत के लिए नया अवसर बन सकता है। एआई आधारित सैन्य तकनीक के क्षेत्र में यह परियोजना भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नई पहचान दिला सकती है।