Election – भवानीपुर में ममता बनर्जी को ऐसे मिला था बड़ा झटका और बीजेपी को मिली मजबूत बढ़त…
Election – पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा सीट इस बार चुनावी नतीजों के बाद सबसे ज्यादा चर्चा में आ गई है। लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर आए परिणामों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जिन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान भवानीपुर को अपना सबसे भरोसेमंद क्षेत्र बताया था, उन्हें यहां भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी से बड़ी हार का सामना करना पड़ा। बूथ स्तर पर सामने आए आंकड़े टीएमसी के लिए चिंता बढ़ाने वाले माने जा रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह नतीजा सिर्फ एक सीट की हार नहीं बल्कि शहरी वोटिंग पैटर्न में बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है। भवानीपुर में भाजपा की बढ़त ने आने वाले समय की राजनीति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है।
बूथ स्तर के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
चुनाव आयोग की ओर से जारी बूथवार आंकड़ों में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिन्होंने राजनीतिक पर्यवेक्षकों का ध्यान खींचा है। सबसे ज्यादा चर्चा उस पोलिंग बूथ की हो रही है जहां ममता बनर्जी खुद मतदान करती हैं। हरीश मुखर्जी रोड स्थित मित्रा इंस्टीट्यूशन केंद्र पर इस बार भाजपा को स्पष्ट बढ़त मिली।
2021 के उपचुनाव में यहां टीएमसी को मामूली बढ़त हासिल हुई थी, लेकिन हालिया चुनाव में स्थिति पूरी तरह बदल गई। आंकड़ों के मुताबिक, इस बूथ पर शुभेंदु अधिकारी को भारी समर्थन मिला जबकि ममता बनर्जी अपेक्षाकृत काफी पीछे रह गईं। इससे यह संकेत मिला कि क्षेत्र के पारंपरिक वोट बैंक में बदलाव हुआ है।
कई बूथों पर बीजेपी का दबदबा
भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 267 मतदान केंद्र हैं। इनमें से बड़ी संख्या में भाजपा ने बढ़त दर्ज की। टीएमसी कुछ चुनिंदा बूथों तक सीमित दिखाई दी। चुनावी आंकड़ों के अनुसार, कई ऐसे मतदान केंद्र भी रहे जहां ममता बनर्जी को बेहद कम वोट मिले।
सरकारी प्रेस परिसर स्थित बूथ नंबर 227 भी चर्चा का विषय बना रहा। यहां पिछले चुनाव में टीएमसी को अच्छी बढ़त मिली थी, लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह उलट गई। भाजपा उम्मीदवार ने इस बूथ पर निर्णायक बढ़त हासिल की। बूथ स्तर पर आए इन नतीजों को भाजपा अपने संगठन विस्तार और शहरी क्षेत्रों में बढ़ते प्रभाव के रूप में देख रही है।
वार्ड स्तर पर भी बदला समीकरण
भवानीपुर सीट कोलकाता नगर निगम के कई वार्डों को मिलाकर बनी है। पहले यहां टीएमसी का मजबूत नियंत्रण माना जाता था। 2021 के उपचुनाव में पार्टी ने सभी प्रमुख वार्डों में बढ़त बनाई थी, लेकिन उसके बाद स्थिति धीरे-धीरे बदलती नजर आई।
लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कई वार्डों में अपनी स्थिति मजबूत की थी और अब विधानसभा चुनाव में यह बढ़त और स्पष्ट दिखाई दी। इस बार केवल एक वार्ड में टीएमसी को बढ़त मिल सकी, जबकि बाकी क्षेत्रों में भाजपा आगे रही। राजनीतिक जानकार इसे लगातार बदलते मतदाता रुझान का संकेत मान रहे हैं।
मतदाता सूची को लेकर उठे सवाल
चुनाव परिणाम आने के बाद ममता बनर्जी ने मतदाता सूची को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जिससे चुनाव प्रभावित हुआ। उन्होंने दावा किया कि हटाए गए मतदाताओं में मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या भी उल्लेखनीय थी, जिन्हें टीएमसी का पारंपरिक समर्थक माना जाता रहा है।
भवानीपुर के वार्ड नंबर 77 को मुस्लिम बहुल इलाका माना जाता है। यही एकमात्र क्षेत्र रहा जहां टीएमसी बढ़त बनाए रखने में सफल रही। इसको लेकर अब राजनीतिक दल अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं।
बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
भवानीपुर के नतीजों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। भाजपा इसे राज्य में अपनी बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत बता रही है, जबकि टीएमसी संगठनात्मक समीक्षा में जुटी हुई है। आने वाले समय में यह सीट राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।