Energy – तेल आपूर्ति संकट के बीच भारत ने अमेरिका से मांगी राहत
Energy – मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव के बीच भारत ने अमेरिका से रूसी तेल आयात से जुड़ी छूट को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पिछले कई हफ्तों से जारी अस्थिरता ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों को प्रभावित किया है, जिसके चलते भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर सतर्क नजर आ रहा है।

अमेरिका ने मार्च में भारत को रूसी तेल खरीद से संबंधित एक विशेष राहत दी थी, ताकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता बनी रहे। बाद में इस व्यवस्था की अवधि बढ़ाई गई, लेकिन मौजूदा छूट की समय सीमा 16 मई की रात तक तय की गई है। अब भारत ने इसे और आगे बढ़ाने की मांग की है।
तेल बाजार में बढ़ी अनिश्चितता
यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस पर कई पश्चिमी प्रतिबंध लगाए गए हैं। हालांकि रूसी तेल पर पूरी तरह रोक नहीं है, लेकिन अमेरिका लगातार भारत सहित कई देशों से मॉस्को से तेल खरीद कम करने की अपील करता रहा है।
इधर फरवरी के अंत से पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव ने तेल आपूर्ति मार्गों को प्रभावित किया है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात में देश के लिए स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना सबसे अहम प्राथमिकता है। सरकार का मानना है कि यदि तेल बाजार में अस्थिरता बनी रहती है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
रूस से तेल खरीद में तेज बढ़ोतरी
छूट की समय सीमा खत्म होने से पहले भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने रूस से तेल खरीद में तेजी दिखाई है। अंतरराष्ट्रीय डेटा एजेंसी केप्लर के मुताबिक मई महीने में अब तक भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 23 लाख बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदा जा रहा है। पूरे महीने का औसत करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि रियायती दरों पर उपलब्ध रूसी तेल भारत के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हुआ है।
LNG खरीद पर भारत का सतर्क रुख
एक ओर जहां भारत रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखे हुए है, वहीं दूसरी तरफ उसने कुछ रूसी LNG शिपमेंट लेने से इनकार किया है। बताया जा रहा है कि ये शिपमेंट अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आते हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस फैसले के कारण रूस से जुड़ा एक LNG कार्गो फिलहाल सिंगापुर के पास रुका हुआ है। इससे साफ संकेत मिलता है कि भारत ऊर्जा जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
रूस और भारत के बीच लगातार बातचीत
ऊर्जा सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत भी जारी है। हाल ही में रूस के उप ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन ने नई दिल्ली में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात की थी। सूत्रों के अनुसार जून में फिर से उच्चस्तरीय वार्ता हो सकती है।
इन बैठकों में तेल आपूर्ति, भुगतान व्यवस्था और दीर्घकालिक ऊर्जा सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। भारत फिलहाल अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रहा है।
सरकार ने ईंधन भंडार पर दिया भरोसा
केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी तरह की चिंता की जरूरत नहीं है। उद्योग जगत के एक कार्यक्रम में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि भारत के पास पर्याप्त मात्रा में LNG और LPG का भंडार मौजूद है।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में देश के पास करीब 69 दिनों का LNG और 45 दिनों का LPG स्टॉक उपलब्ध है। साथ ही घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए LPG उत्पादन भी बढ़ाया गया है, ताकि आपूर्ति प्रभावित न हो।