Great Nicobar Project – राहुल गांधी के आरोपों पर बोले पूर्व वायुसेना प्रमुख, बताया भारत के लिए अहम कदम
Great Nicobar Project – पूर्व वायुसेना प्रमुख और भाजपा नेता एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) आरकेएस भदौरिया ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कैंपबेल बे में चल रहे “ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट” को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। भदौरिया का कहना है कि यह परियोजना भारत की दीर्घकालिक रणनीति और आर्थिक सुदृढ़ता के लिए बेहद अहम है। उन्होंने राहुल गांधी के बयानों को ‘भ्रामक और तथ्यहीन’ बताते हुए कहा कि इस प्रोजेक्ट को ऐसे प्रस्तुत किया जा रहा है मानो यह पर्यावरण या स्थानीय समुदायों के खिलाफ हो, जबकि हकीकत बिल्कुल अलग है।

राहुल गांधी ने लगाए गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने हाल ही में इस परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने ‘ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट’ को देश की प्राकृतिक धरोहर और आदिवासी समुदायों के विरुद्ध बताया और इसे स्वतंत्र भारत के “सबसे बड़े पर्यावरणीय अपराधों” में से एक करार दिया। गांधी ने दावा किया कि इस परियोजना के तहत हजारों हेक्टेयर में फैले वर्षावनों की कटाई होगी और लाखों पेड़ सरकार की महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ जाएंगे। उन्होंने कहा था कि वे इस मुद्दे को संसद में जोरदार तरीके से उठाएंगे।
भदौरिया का पलटवार – “आरोपों में नहीं है कोई सच्चाई”
राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए आरकेएस भदौरिया ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना भारत की दीर्घकालिक समुद्री रणनीति और क्षेत्रीय संतुलन के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि ‘ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट’ सिर्फ एक निर्माण योजना नहीं, बल्कि एक समग्र विकास कार्यक्रम है जिसमें “स्मार्ट सिटी” के तमाम घटक शामिल हैं।
परियोजना के प्रमुख हिस्सों में शामिल हैं –
- अंतरराष्ट्रीय ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट, जिसकी वार्षिक क्षमता करीब 16.2 मिलियन कंटेनर यूनिट होगी,
- ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, जो नागरिक और सैन्य दोनों उपयोगों के लिए बनाया जा रहा है,
- हाइब्रिड पावर प्लांट, जहां गैस और सौर ऊर्जा से मिलकर लगभग 450 मेगावाट बिजली उत्पन्न होगी,
- और नियोजित टाउनशिप, जिसमें 6.5 लाख तक लोगों के बसने की क्षमता होगी।
भदौरिया ने कहा कि इस परियोजना से भारत न केवल ऊर्जा और व्यापार के नए केंद्र के रूप में उभरेगा, बल्कि दक्षिण एशिया में उसकी रणनीतिक स्थिति भी मजबूत होगी।
सामरिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना
पूर्व वायुसेना प्रमुख ने बताया कि भारत की सुरक्षा नीति में अंडमान और निकोबार क्षेत्र की भूमिका अत्यंत निर्णायक है।
उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार द्वीप अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों के बेहद पास स्थित है। यह क्षेत्र स्ट्रेट ऑफ मलक्का और हॉरमुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री रास्तों से करीब 150 किलोमीटर की दूरी पर है—जो दुनिया के कुल व्यापार का लगभग एक तिहाई हिस्सा संभालते हैं।
भदौरिया के मुताबिक, यह परियोजना भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी, सुरक्षा और सामरिक नियंत्रण की नई क्षमता देगी। चीन और अन्य देशों की तेज़ी से बढ़ती उपस्थिति को देखते हुए यह परियोजना भारत की सामरिक ताकत को कई गुना बढ़ा सकती है।
पर्यावरण और स्थानीय समुदायों को लेकर सफाई
भदौरिया ने यह भी कहा कि कुछ लोगों द्वारा पेड़ों की कटाई और आदिवासी विस्थापन का जो नैरेटिव बनाया जा रहा है, वह तथ्यों पर आधारित नहीं है। उनके अनुसार, पूरे द्वीप के कुल वन क्षेत्र का केवल 1.78 प्रतिशत हिस्सा ही परियोजना से प्रभावित होगा।
उन्होंने बताया कि सरकार ने पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और आदिवासी हितों की सुरक्षा के लिए विशेष समितियाँ गठित की हैं। परियोजना में स्थानीय समुदायों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर सुनिश्चित किए जा रहे हैं, ताकि विकास उनके सहभागिता से आगे बढ़े।
सेना के पूर्व अधिकारी ने भी जताया समर्थन
पूर्व मेजर जनरल केके सिन्हा ने भी ‘ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट’ को भारत के भविष्य के लिए “गेम चेंजर” बताया। अपने बयान में उन्होंने कहा कि यह योजना भारत को न केवल आर्थिक मजबूती देगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मंच पर उसकी स्थिति को अभूतपूर्व ऊँचाई तक ले जाएगी।
सिन्हा का दावा है कि कुछ विदेशी ताकतें नहीं चाहतीं कि यह परियोजना सफल हो क्योंकि इससे भारत की क्षेत्रीय प्रभुत्व क्षमता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि देश के भीतर से उठ रही आलोचनात्मक आवाज़ें उन्हीं एजेंडों को समर्थन देती दिख रही हैं जो भारत के दीर्घकालिक हितों के खिलाफ हैं।
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत की सुरक्षा, ऊर्जा और व्यापरिक संभावनाओं को नए आयाम देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। भदौरिया और सिन्हा दोनों का कहना है कि यह पहल भारत की “Blue Economy Vision” के अनुरूप है, जिसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण को समान प्राथमिकता दी गई है।