Hantavirus – डब्ल्यूएचओ ने संक्रमण को गंभीर बताया, कई देशों को दिया सतर्कता संदेश
Hantavirus – विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हंता वायरस संक्रमण को गंभीर संक्रामक बीमारी बताते हुए कई देशों को सतर्क रहने की सलाह दी है। हालांकि संगठन ने साफ किया है कि यह संक्रमण कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी का रूप लेने वाला नहीं माना जा रहा, लेकिन इसके मामलों को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां निगरानी बनाए हुए हैं। हाल ही में एक क्रूज जहाज से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद इस वायरस को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बढ़ गई है।

क्रूज से जुड़े मामलों ने बढ़ाई चिंता
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, इस संक्रमण से जुड़ी पहली मौत 11 अप्रैल को दर्ज की गई थी। मृतक 70 वर्षीय नीदरलैंड निवासी यात्री था, जो एक क्रूज यात्रा पर था। बाद में उसका शव सेंट हेलेना द्वीप पर उतारा गया। जानकारी के मुताबिक, उसकी पत्नी को दक्षिण अफ्रीका ले जाया गया था, जहां हवाई अड्डे पर उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और 26 अप्रैल को अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। इसके अलावा एक जर्मन महिला यात्री में भी संक्रमण की पुष्टि हुई है।
इंसानों तक कैसे पहुंचता है संक्रमण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हंता वायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों के संपर्क से फैलता है। चूहों के मल, मूत्र या लार में मौजूद वायरस सूखने के बाद हवा में फैल सकता है और सांस के जरिए इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाता है। यही कारण है कि बंद या गंदे स्थानों की सफाई करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संक्रमण सामान्य तौर पर इंसान से इंसान में तेजी से नहीं फैलता।
शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे होते हैं
इस बीमारी के शुरुआती संकेत सामान्य वायरल संक्रमण जैसे दिखाई दे सकते हैं। संक्रमित व्यक्ति को बुखार, शरीर दर्द, कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। गंभीर स्थिति में यह संक्रमण फेफड़ों और किडनी को प्रभावित कर सकता है। कुछ मामलों में सांस लेने में दिक्कत और फेफड़ों में तरल पदार्थ भरने जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी होता है।
भारत में फिलहाल बड़ा खतरा नहीं
भारत में फिलहाल हंता वायरस को लेकर किसी बड़े खतरे या राष्ट्रीय अलर्ट की स्थिति नहीं बताई गई है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, देश में इसके मामले बहुत सीमित संख्या में सामने आए हैं। चूंकि इसके लक्षण कई सामान्य बीमारियों से मिलते-जुलते हैं, इसलिए पहचान करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विशेषज्ञ लगातार निगरानी और जागरूकता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं मामले
भारत में अतीत में भी हंता वायरस संक्रमण के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। वर्ष 2008 में तमिलनाडु के वेल्लोर क्षेत्र में इस वायरस से जुड़े कई संक्रमण सामने आए थे। उस समय चूहों और सांपों को पकड़ने वाले इरुला समुदाय के लोग प्रभावित हुए थे। इसके अलावा 2016 में मुंबई में एक बच्चे की मौत के मामले में भी इस संक्रमण का जिक्र किया गया था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, फेफड़ों से रक्तस्राव इस बीमारी के गंभीर लक्षणों में शामिल हो सकता है।
कोरोना वायरस से अलग है संक्रमण
विशेषज्ञों का कहना है कि हंता वायरस और कोरोना वायरस दोनों आरएनए वायरस की श्रेणी में आते हैं, लेकिन इनके फैलने का तरीका पूरी तरह अलग है। कोरोना वायरस जहां इंसानों के बीच तेजी से फैलता है, वहीं हंता वायरस का संक्रमण अधिकतर संक्रमित चूहों के संपर्क से जुड़ा होता है। इसी वजह से इसे कोविड-19 जैसी व्यापक महामारी की श्रेणी में नहीं रखा जा रहा।
कई देशों को भेजी गई जानकारी
डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने बताया कि संक्रमण से जुड़े यात्रियों के कारण 12 देशों को सूचना भेजी गई है। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, तुर्किये, सिंगापुर और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां फिलहाल यात्रियों की निगरानी और संपर्क ट्रेसिंग पर ध्यान दे रही हैं।