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HimantaSarma – असम में क्यों मुख्यमंत्री हिमंत को लोग कहते हैं ‘मामा’, जानें कारण…

HimantaSarma – असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा एक बार फिर राज्य की सत्ता संभालने के बाद चर्चा में हैं। विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को बड़ी जीत दिलाने के बाद उन्होंने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। जालुकबाड़ी सीट से बड़ी जीत दर्ज करने वाले हिमंत सरमा की लोकप्रियता केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य में बड़ी संख्या में लोग उन्हें एक खास नाम से पुकारते हैं। असम में बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक उन्हें “मामा” कहकर संबोधित करते हैं।

why himanta sarma called mama assam

यह नाम अब उनकी सार्वजनिक पहचान का हिस्सा बन चुका है। हालांकि इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी भी जुड़ी हुई है, जिसने धीरे-धीरे पूरे राज्य में जगह बना ली।

शिक्षा मंत्री रहते शुरू हुई पहचान

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक हिमंत बिस्वा सरमा को “मामा” कहे जाने की शुरुआत उस दौर में हुई जब वे राज्य सरकार में शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उस समय असम में स्कूली छात्राओं को साइकिल वितरण योजना शुरू की गई थी। इस योजना का उद्देश्य छात्राओं को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना बताया गया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, माजुली क्षेत्र के कुछ बच्चों ने इसी दौरान उन्हें मजाकिया और अपनत्व भरे अंदाज में “मामा” कहना शुरू किया। बाद में यह संबोधन धीरे-धीरे दूसरे जिलों तक फैल गया। कई कार्यक्रमों और रैलियों में बच्चे उनसे साइकिल की मांग करते हुए इसी नाम से बातचीत करने लगे।

चुनावी सभाओं में भी सुनाई देने लगा नाम

बताया जाता है कि एक चुनावी सभा के दौरान हिमंत सरमा ने छात्रों से पूछा था कि क्या उन्हें भी साइकिल चाहिए। बच्चों ने उत्साह के साथ इसका जवाब दिया। इसके बाद कई जगहों पर छात्र उनसे पूछते दिखाई दिए कि उन्हें साइकिल कब मिलेगी। इसी बातचीत के दौरान “मामा” शब्द ज्यादा लोकप्रिय होता चला गया।

सोशल मीडिया पर भी ऐसे कई वीडियो सामने आए, जिनमें स्कूली बच्चे उन्हें इसी नाम से बुलाते नजर आए। बाद में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों और समर्थकों ने भी इसी संबोधन का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। राजनीतिक अभियानों में “मामा की गारंटी” जैसे नारे भी चर्चा में रहे।

जनता से सीधे जुड़ने वाली छवि

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हिमंत बिस्वा सरमा ने खुद को ऐसे नेता के रूप में पेश किया है जो आम लोगों के बीच सहज तरीके से पहुंचते हैं। कई मौकों पर उन्हें लोगों की समस्याएं सीधे सुनते और त्वरित फैसले लेते हुए देखा गया है। इसी कारण लोगों के बीच उनके प्रति एक पारिवारिक जुड़ाव की भावना बनी।

विशेषज्ञों के अनुसार, “मामा” की छवि ने उनकी लोकप्रियता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे उनकी पहचान केवल प्रशासनिक नेता तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक ऐसे जननेता के रूप में बनी जो लोगों की भाषा और भावनाओं से जुड़ता है।

भारतीय राजनीति में प्रचलित रहे ऐसे संबोधन

भारतीय राजनीति में नेताओं को विशेष नामों से बुलाने की परंपरा नई नहीं है। अलग-अलग राज्यों में समर्थक अपने पसंदीदा नेताओं को अपनत्व और सम्मान दिखाने के लिए विशेष उपनाम देते रहे हैं।

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता को समर्थक “अम्मा” कहते थे, जबकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी “दीदी” के नाम से लोकप्रिय हैं। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को “बहनजी” और महाराष्ट्र के नेता अजित पवार को “दादा” कहकर संबोधित किया जाता रहा है। इसी क्रम में असम में हिमंत बिस्वा सरमा के लिए “मामा” नाम एक राजनीतिक पहचान बन चुका है।

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