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MoneyLaundering – चर्चित आर्थिक मामलों की जांच कर चुके अधिकारी ने ली वीआरएस

MoneyLaundering – प्रवर्तन निदेशालय (ED) में लंबे समय तक अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी सत्यव्रत कुमार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद उनकी सेवा से विदाई की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है। आर्थिक अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कई चर्चित मामलों की जांच का हिस्सा रहे कुमार हाल के समय में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में कमिश्नर (अपील) के पद पर कार्यरत थे।

ed officer satyavrat kumar vrs

सत्यव्रत कुमार को कुछ समय पहले उनके मूल विभाग में वापस भेजा गया था। इससे पहले वे वर्षों तक प्रवर्तन निदेशालय में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके थे और एजेंसी के अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते थे।

लंबे समय तक ईडी में निभाई अहम भूमिका

साल 2004 बैच के IRS अधिकारी सत्यव्रत कुमार सीमा शुल्क और अप्रत्यक्ष कर सेवा से जुड़े रहे हैं। उन्होंने करीब 12 वर्षों तक प्रवर्तन निदेशालय में प्रतिनियुक्ति पर काम किया। इस दौरान वे उन वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल रहे जिन्होंने एजेंसी में सबसे लंबे समय तक सेवा दी।

अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने आर्थिक अपराध, बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच का नेतृत्व किया। मुंबई स्थित ईडी के पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं।

तय समय से पहले सेवा छोड़ने का फैसला

अधिकारियों के अनुसार, 48 वर्षीय सत्यव्रत कुमार की नियमित सेवानिवृत्ति वर्ष 2037 में प्रस्तावित थी। ऐसे में उन्होंने निर्धारित अवधि से लगभग 11 वर्ष पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का निर्णय लिया है।

सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, उन्होंने निजी कार्यों और व्यक्तिगत रुचियों पर अधिक समय देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। अप्रैल में उनके वीआरएस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी, जबकि औपचारिक आदेश बाद में जारी किए गए।

कई चर्चित मामलों की जांच से जुड़े रहे

प्रवर्तन निदेशालय में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान सत्यव्रत Kumar कई बड़े मामलों की जांच प्रक्रिया का हिस्सा रहे। इनमें पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े बहुचर्चित बैंक धोखाधड़ी मामले की जांच भी शामिल थी, जिसमें कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के नाम सामने आए थे। जांच के दौरान विदेशों में स्थित कई संपत्तियों को चिन्हित करने और कार्रवाई आगे बढ़ाने में एजेंसी की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

इसके अलावा, विजय माल्या से जुड़े बैंक ऋण अनियमितता मामले में भी वे जांच प्रक्रिया से जुड़े रहे। आर्थिक अपराधों की श्रेणी में आने वाले अन्य मामलों में भी उन्होंने एजेंसी की कार्रवाई का नेतृत्व किया।

महादेव ऐप और अन्य मामलों में भी रही जिम्मेदारी

सट्टेबाजी से जुड़े चर्चित महादेव ऑनलाइन प्लेटफॉर्म प्रकरण की जांच के दौरान भी सत्यव्रत कुमार का नाम प्रमुख अधिकारियों में शामिल रहा। यह मामला विभिन्न राज्यों में राजनीतिक और कारोबारी हलकों तक पहुंचने के कारण व्यापक चर्चा में रहा था।

इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र से जुड़े कुछ संवेदनशील वित्तीय मामलों की जांच में भी उनकी भूमिका रही। इन मामलों ने राष्ट्रीय स्तर पर काफी ध्यान आकर्षित किया था और प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई लगातार सुर्खियों में रही थी।

हाल के वर्षों में ऐसे फैसलों की बढ़ी चर्चा

पिछले एक वर्ष के भीतर यह दूसरा अवसर है जब प्रवर्तन निदेशालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके किसी अधिकारी ने सेवा अवधि पूरी होने से काफी पहले सरकारी पद छोड़ने का फैसला किया है।

इससे पहले पूर्व संयुक्त निदेशक कपिल राज ने भी अपनी निर्धारित सेवानिवृत्ति से कई वर्ष पहले इस्तीफा दिया था। उन्होंने भी ईडी में लंबे समय तक काम किया था और कई चर्चित जांचों की निगरानी की थी। ऐसे मामलों ने प्रशासनिक और जांच एजेंसियों में वरिष्ठ अधिकारियों के करियर निर्णयों को लेकर चर्चा को बढ़ाया है।

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