UCCModel – बंगाल और असम चुनाव नतीजों में उत्तराखंड मॉडल की गूंज
UCCModel – पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की उल्लेखनीय सफलता के साथ एक बार फिर समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी चर्चा के केंद्र में आ गई है। चुनावी विश्लेषण में यह बात उभरकर सामने आ रही है कि उत्तराखंड में लागू किए गए यूसीसी मॉडल की छाप इन राज्यों की राजनीति पर भी दिखाई दी। भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में इसी मॉडल को आधार बनाते हुए यूसीसी लागू करने का वादा किया था, जिसे मतदाताओं के बीच एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में देखा गया।

उत्तराखंड मॉडल बना राजनीतिक संदर्भ बिंदु
उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने स्वतंत्रता के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान इस कानून को लागू करने का वादा किया था। चुनाव में स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद सरकार ने इस दिशा में तेजी से काम किया और जनवरी 2025 से राज्य में यूसीसी लागू कर दिया गया। इस कानून के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे विषयों को एक समान कानूनी ढांचे में लाया गया है। इससे पहले ये विषय अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के तहत संचालित होते थे।
चुनावी रणनीति में यूसीसी की भूमिका
भाजपा ने पश्चिम बंगाल और असम में अपने चुनावी अभियान के दौरान यूसीसी को प्रमुखता से शामिल किया। पार्टी ने इसे केवल कानूनी सुधार नहीं बल्कि सामाजिक समानता और महिला अधिकारों से जुड़े मुद्दे के रूप में प्रस्तुत किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रणनीति मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को प्रभावित करने में सफल रही। खासकर शहरी और युवा मतदाताओं के बीच इस विषय को लेकर रुचि देखी गई।
राष्ट्रीय स्तर पर उभरता एजेंडा
यूसीसी अब धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल होता जा रहा है। भाजपा पहले ही अनुच्छेद 370 और राम मंदिर जैसे बड़े मुद्दों पर अपने वादे पूरे कर चुकी है। ऐसे में यूसीसी को पार्टी के अगले बड़े वैचारिक एजेंडे के रूप में देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल और असम के चुनाव परिणामों के बाद यह संकेत और मजबूत हुआ है कि पार्टी इस विषय को आगे भी प्रमुखता दे सकती है।
अन्य राज्यों में भी बढ़ी सक्रियता
उत्तराखंड के बाद अब अन्य राज्यों में भी यूसीसी को लेकर गतिविधियां तेज हो रही हैं। गुजरात में इस संबंध में गठित समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है। बताया जा रहा है कि वहां तैयार किया जा रहा मसौदा काफी हद तक उत्तराखंड मॉडल से प्रेरित है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आने वाले समय में और भी राज्यों में इस कानून को लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
केंद्रीय नेतृत्व का समर्थन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत भाजपा के शीर्ष नेताओं ने उत्तराखंड में लागू यूसीसी की सराहना की है। पार्टी इसे एक समान और न्यायसंगत समाज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में पेश कर रही है। राजनीतिक तौर पर भी यह मुद्दा भाजपा के दीर्घकालिक एजेंडे का हिस्सा बन चुका है।