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VoterList – निर्वाचन आयोग जल्द शुरू करेगा मतदाता सूची पुनरीक्षण का अगला चरण

VoterList – पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद निर्वाचन आयोग अब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तीसरे चरण की तैयारी में जुट गया है। आयोग आने वाले दिनों में देश के बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया शुरू कर सकता है। अधिकारियों के मुताबिक इस चरण में करीब 40 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच और अद्यतन किया जाएगा।

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निर्वाचन आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। आयोग पहले ही देश के कई हिस्सों में यह अभियान पूरा कर चुका है और अब शेष राज्यों को इसमें शामिल करने की तैयारी चल रही है।

चुनावी कार्यक्रम के कारण टली प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने की वजह से इस प्रक्रिया को कुछ समय के लिए स्थगित किया गया था। चुनावी गतिविधियों के समाप्त होने के बाद अब आयोग फिर से इस अभियान को आगे बढ़ाने की योजना बना रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह मतदान प्रक्रिया में व्यस्त रहती है, इसलिए मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण को बाद के लिए टालना पड़ा था। अब संबंधित राज्यों में प्रशासनिक स्तर पर तैयारी तेज कर दी गई है।

कई राज्यों में पहले ही पूरा हो चुका अभियान

निर्वाचन आयोग अब तक 10 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी कर चुका है। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्य शामिल हैं। इसके अलावा कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में भी अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जा चुकी है।

आयोग के आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 99 करोड़ है। इनमें से करीब 60 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन पहले दो चरणों में पूरा किया जा चुका है। अब बाकी मतदाताओं के नामों की समीक्षा तीसरे चरण में की जाएगी।

सभी राज्यों को भेजे गए निर्देश

निर्वाचन आयोग ने इस वर्ष फरवरी में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए थे। आयोग ने संकेत दिया था कि अप्रैल के आसपास इस प्रक्रिया को शुरू किया जा सकता है, लेकिन चुनावी कारणों से इसमें देरी हुई।

अब जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया बाकी है, उनमें दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर समेत कई क्षेत्र शामिल हैं। आयोग का लक्ष्य है कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूरे देश में एक समान और अद्यतन मतदाता सूची उपलब्ध हो।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला

विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर पहले भी राजनीतिक विवाद सामने आ चुके हैं। कुछ राजनीतिक दलों ने अलग-अलग राज्यों में इस प्रक्रिया को अदालत में चुनौती दी थी। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में मतदाता सूची संशोधन को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।

कुछ दलों ने आरोप लगाया था कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए। वहीं आयोग का कहना था कि सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए सत्यापन आवश्यक है। बिहार में प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों ने कथित रूप से कुछ विदेशी नागरिकों की पहचान का दावा भी किया था, हालांकि आयोग की ओर से इस संबंध में विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए।

मतदाता संख्या में आई कमी

निर्वाचन आयोग के दूसरे चरण के आंकड़ों के अनुसार, पुनरीक्षण अभियान के बाद कई राज्यों में मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई। आयोग ने बताया कि सत्यापन के बाद लाखों ऐसे नाम हटाए गए जो दोहराव, स्थानांतरण या अन्य कारणों से सूची में बने हुए थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य चुनावी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है, हालांकि राजनीतिक स्तर पर इसे लेकर बहस लगातार जारी है।

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