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WFHPolicy – पश्चिम एशिया संकट के बीच पीएम ने बचत पर दिया जोर

WFHPolicy – पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था पर उसके असर के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से संसाधनों के सावधानीपूर्वक उपयोग की अपील की है। गुजरात में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकारी और निजी संस्थानों को डिजिटल माध्यमों का अधिक इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कुछ स्कूलों से फिलहाल ऑनलाइन कक्षाओं को प्राथमिकता देने का भी अनुरोध किया।

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प्रधानमंत्री लगातार दूसरे दिन ईंधन की बचत, वर्क फ्रॉम होम और सीमित संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग की बात करते नजर आए। उनके इन बयानों के बाद देश में कोविड काल जैसी व्यवस्थाओं की वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि सरकार की ओर से अब तक किसी नई पाबंदी या दिशा-निर्देश की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

डिजिटल व्यवस्था अपनाने की सलाह

प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक ने कामकाज को पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान बना दिया है। ऐसे में कार्यालयों और संस्थानों को डिजिटल बैठकों और घर से काम करने जैसी व्यवस्थाओं पर जोर देना चाहिए। उनका मानना है कि इससे ईंधन की खपत कम होगी और अनावश्यक यात्रा भी घटेगी।

उन्होंने शिक्षा संस्थानों का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां संभव हो, वहां ऑनलाइन कक्षाओं को प्राथमिकता दी जा सकती है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश को इस समय सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है और हर नागरिक को अपने स्तर पर सहयोग करना चाहिए।

वैश्विक संकट का भारत पर असर

प्रधानमंत्री मोदी ने माना कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर भारत सहित दुनिया के कई देशों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, मौजूदा हालात केवल क्षेत्रीय संकट नहीं हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डालने वाली बड़ी चुनौती बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया पहले महामारी और आर्थिक दबावों से गुजर चुकी है, और अब नई परिस्थितियां सामने हैं जिनका प्रभाव कई क्षेत्रों में महसूस किया जा रहा है।

कोविड काल का भी किया जिक्र

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी के दौरान देश की एकजुटता का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोगों ने महामारी के समय अनुशासन और सहयोग का परिचय दिया था, उसी तरह मौजूदा चुनौतियों का सामना भी सामूहिक प्रयासों से किया जा सकता है।

उन्होंने लोगों से संयम बरतने और संसाधनों का सोच-समझकर इस्तेमाल करने की अपील की। सरकार का कहना है कि आम नागरिकों पर संकट का असर कम से कम पड़े, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

ईंधन और आयात पर बढ़ते खर्च की चिंता

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और खाद्य तेलों का आयात करता है, जिस पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। वैश्विक तनाव के कारण इन वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है और आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में देश को ऊर्जा और उपभोग के मामले में सावधानी बरतने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि यदि लोग छोटी-छोटी बचत की आदत अपनाएं तो इसका व्यापक असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। प्रधानमंत्री ने लोगों से अनावश्यक ईंधन खपत कम करने और घरेलू स्तर पर भी संसाधनों का संतुलित उपयोग करने का आग्रह किया।

सरकार की ओर से अभी कोई औपचारिक फैसला नहीं

प्रधानमंत्री की अपीलों के बाद कई जगहों पर वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन कक्षाओं को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि सरकार की तरफ से अभी तक किसी तरह की अनिवार्य व्यवस्था लागू करने का निर्णय सामने नहीं आया है। फिलहाल इसे एहतियाती और जागरूकता आधारित अपील के तौर पर देखा जा रहा है।

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