VaibhavSuryavanshi – 15 साल की उम्र में अर्धशतक, वैभव ने रचा नया विश्व रिकॉर्ड
VaibhavSuryavanshi- भारतीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने उम्र से जुड़े कई पुराने रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ अपने शुरुआती अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में से एक में उन्होंने शानदार अर्धशतक जमाकर इतिहास रच दिया। इस पारी के साथ वैभव किसी भी प्रारूप में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने यह उपलब्धि केवल 15 साल 118 दिन की उम्र में हासिल की।

नेपाल के कुशल मल्ला का रिकॉर्ड भी टूटा
इससे पहले सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड नेपाल के बल्लेबाज कुशल मल्ला के नाम था। मल्ला ने 8 फरवरी 2020 को अमेरिका के खिलाफ वनडे मुकाबले में 15 साल 340 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी। वैभव ने उससे काफी कम उम्र में अर्धशतक बनाकर नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा लिया है।
सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक लगाने वाले खिलाड़ी
| खिलाड़ी | उम्र |
|---|---|
| वैभव सूर्यवंशी (भारत) | 15 साल 118 दिन |
| कुशल मल्ला (नेपाल) | 15 साल 340 दिन |
| लुइस ब्रूस (जिब्राल्टर) | 16 साल 56 दिन |
| लुइस ब्रूस (जिब्राल्टर) | 16 साल 57 दिन |
| कविन चड्ढा (इंडोनेशिया) | 16 साल 76 दिन |
सचिन तेंदुलकर और शाहिद अफरीदी का रिकॉर्ड भी पीछे छूटा
फुल मेंबर देशों के खिलाड़ियों की बात करें तो यह उपलब्धि पहले भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के नाम थी। सचिन ने 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ फैसलाबाद टेस्ट में 16 साल 213 दिन की उम्र में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक लगाया था। इसके बाद 1996 में पाकिस्तान के शाहिद अफरीदी 16 साल 214 दिन की उम्र में इस रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन एक दिन के अंतर से वह सचिन से आगे नहीं निकल सके। अब करीब 37 वर्ष बाद वैभव सूर्यवंशी ने यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है और फुल मेंबर देशों में सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं।
फुल मेंबर देशों के सबसे युवा अर्धशतकवीर
भारत के युवा बल्लेबाज ने इस उपलब्धि के साथ क्रिकेट इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है। फुल मेंबर टीमों में सबसे कम उम्र में पहला अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक लगाने वाले खिलाड़ियों की सूची में अब वैभव पहले स्थान पर हैं। उनके बाद सचिन तेंदुलकर, शाहिद अफरीदी, पाकिस्तान के मुश्ताक मोहम्मद और बांग्लादेश के मोहम्मद अशरफुल का नाम शामिल है। यह उपलब्धि भारतीय क्रिकेट के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
भविष्य के लिए बढ़ी उम्मीदें
कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह का प्रदर्शन किसी भी खिलाड़ी के आत्मविश्वास को मजबूत करता है। वैभव सूर्यवंशी ने अपने शुरुआती करियर में जिस तरह का संयम और बल्लेबाजी कौशल दिखाया है, उससे उनके भविष्य को लेकर उम्मीदें और बढ़ गई हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वह इसी निरंतरता के साथ प्रदर्शन करते रहे तो आने वाले वर्षों में भारतीय टीम के अहम बल्लेबाजों में शामिल हो सकते हैं।