CyberCrime – कानपुर में खाते से रकम उड़ाने के बाद ठग ने खुद किया पीड़ित को फोन
CyberCrime- उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक डेयरी कारोबारी के बैंक खाते से 2.80 लाख रुपये निकलने के कुछ समय बाद कथित ठग ने स्वयं फोन कर घटना की जानकारी दी और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह भी दी। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने न किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक किया और न ही किसी व्यक्ति के साथ ओटीपी या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा की। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

खाते से दो चरणों में निकाली गई रकम
दादानगर सेवाग्राम कॉलोनी निवासी डेयरी संचालक ज्ञानू सिंह के अनुसार उनका बैंक खाता गोविंदनगर स्थित एक निजी बैंक शाखा में है। उन्होंने बताया कि हाल ही में उनके खाते में टीडीएस की राशि सहित कुल लगभग 2.80 लाख रुपये मौजूद थे। इसी दौरान उन्हें अलग-अलग मोबाइल नंबरों से व्हाट्सएप कॉल और संदेश मिलने लगे। आशंका होने पर उन्होंने बैंक से संपर्क कर सुरक्षा संबंधी सलाह भी ली, लेकिन कुछ दिनों बाद दो अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए खाते से पूरी रकम निकल गई।
कॉल कर दी घटना की जानकारी
पीड़ित के अनुसार, पैसे कटने के करीब दो घंटे बाद एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने कथित तौर पर बताया कि खाते से रकम निकाल ली गई है और अब साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करा दी जाए। शिकायतकर्ता का कहना है कि कॉल करने वाले ने चुनौतीपूर्ण अंदाज में यह भी कहा कि उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकेगी। इसके बाद उन्होंने बैंक से लेनदेन की पुष्टि कराई और पुलिस से शिकायत की।
पुलिस कर रही तकनीकी जांच
गोविंदनगर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार, जिन मोबाइल नंबरों से संपर्क किया गया था, उन्हें जांच के दायरे में लिया गया है। साइबर सेल की सहायता से कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मथुरा में साइबर अपराधियों पर बड़ी कार्रवाई
इसी बीच उत्तर प्रदेश पुलिस ने मथुरा में साइबर अपराध के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में गोवर्धन, बरसाना, कोसीकलां और शेरगढ़ थाना क्षेत्रों के कई गांवों में एक साथ छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में 42 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें बाद में अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
कई उपकरण और दस्तावेज बरामद
पुलिस के अनुसार, अभियान के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी आधार कार्ड, संदिग्ध सिम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए गए। जांच एजेंसियां इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच करा रही हैं, ताकि साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क की पूरी जानकारी सामने आ सके।
कई राज्यों में सक्रिय होने का दावा
पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि उनका नेटवर्क उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के लोगों को निशाना बनाता था। अधिकारियों के अनुसार, ठगी के बाद मोबाइल नंबर बदलने और अलग-अलग तरीकों से लोगों को जाल में फंसाने की रणनीति अपनाई जाती थी। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है।