उत्तर प्रदेश

RamMandir – राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने पहले CEO की तलाश तेज की, तय किए प्रमुख मानदंड

RamMandir – श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर प्रशासन को और अधिक व्यवस्थित तथा पारदर्शी बनाने की दिशा में पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हाल के घटनाक्रमों के बाद ट्रस्ट प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। इस उद्देश्य से गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ऐसे उम्मीदवार की तलाश कर रही है, जो प्रशासनिक दक्षता के साथ मंदिर की धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारियों को भी प्रभावी ढंग से निभा सके।

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चयन प्रक्रिया में श्रद्धा और सेवा भाव को प्राथमिकता

सर्च कमेटी के सदस्य सुरेश हावरे ने एक मीडिया बातचीत में कहा कि इस पद के लिए केवल प्रबंधन का अनुभव पर्याप्त नहीं होगा। उनके अनुसार, उम्मीदवार में भगवान राम के प्रति आस्था, समाज सेवा की भावना और श्रद्धालुओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण होना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मंदिर का संचालन केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा दायित्व भी है।

CEO की भूमिका होगी व्यापक

ट्रस्ट के अनुसार, नियुक्त होने वाले CEO को मंदिर की दैनिक व्यवस्थाओं की निगरानी करनी होगी। इसमें श्रद्धालुओं की सुविधाओं का समन्वय, भीड़ प्रबंधन, मानव संसाधन, आपदा प्रबंधन और वित्तीय प्रशासन जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल होंगे। इसके अलावा खरीद प्रक्रिया और संसाधनों के प्रभावी उपयोग की जिम्मेदारी भी इसी पद के दायरे में रहेगी।

तीन सदस्यीय समिति कर रही है चयन

ट्रस्ट ने 6 जुलाई को CEO के चयन के लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी का गठन किया था। समिति में सेवानिवृत्त परमाणु वैज्ञानिक सुरेश हावरे, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रदीप कोहली और लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी शामिल हैं। समिति जल्द ही बैठक कर चयन प्रक्रिया की रूपरेखा को अंतिम रूप देगी। प्रारंभिक स्तर पर ऑनलाइन बैठक और उसके बाद प्रत्यक्ष बैठक आयोजित किए जाने की योजना है।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए नई व्यवस्था

समिति के सदस्यों का मानना है कि अयोध्या में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और विशेष अवसरों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में आधुनिक तकनीक और व्यवस्थित प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। उनका कहना है कि बेहतर संचालन के लिए डिजिटल तकनीक और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था का समन्वय आवश्यक होगा।

वित्तीय पारदर्शिता पर रहेगा विशेष ध्यान

सर्च कमेटी ने वित्तीय प्रबंधन को भी इस पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल किया है। समिति का कहना है कि मंदिर में प्राप्त होने वाले दान और अन्य संसाधनों का पारदर्शी एवं जवाबदेह तरीके से प्रबंधन होना चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उपलब्ध संसाधनों का उपयोग सामाजिक और जनकल्याण से जुड़े कार्यों में प्रभावी ढंग से किया जा सके।

मजबूत संस्थागत व्यवस्था बनाने पर फोकस

समिति का उद्देश्य ऐसे व्यक्ति का चयन करना है जो पेशेवर प्रशासनिक क्षमता और धार्मिक मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित कर सके। ट्रस्ट का मानना है कि एक सुदृढ़ प्रबंधन व्यवस्था मंदिर के संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाएगी और श्रद्धालुओं का विश्वास भी मजबूत करेगी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए CEO को मंदिर प्रशासन की प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।

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