उत्तर प्रदेश

SmartMeter – स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता पर आयोग सख्त, बिजली कंपनियों से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब

SmartMeter – राज्य में लगाए गए स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार उठ रही उपभोक्ताओं की शिकायतों के बीच विद्युत नियामक आयोग ने सभी बिजली वितरण कंपनियों से गुणवत्ता परीक्षण और चेक मीटरों की जांच संबंधी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने निर्देश दिया है कि नियमों के तहत लगाए गए चेक मीटरों की जांच कर उनकी सटीकता और गुणवत्ता का पूरा विवरण जल्द उपलब्ध कराया जाए, ताकि मीटरों की विश्वसनीयता का निष्पक्ष आकलन किया जा सके।

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स्मार्ट मीटरों की जांच पर आयोग की कड़ी निगरानी

प्रदेश में करीब 90 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। नियमानुसार इनमें लगभग पांच प्रतिशत स्थानों पर पुराने मीटरों को चेक मीटर के रूप में सुरक्षित रखा जाना था, जिससे नए मीटरों की रीडिंग का मिलान किया जा सके। बिजली दरों से जुड़ी सुनवाई के दौरान राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद और कई उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटरों की सटीकता पर सवाल उठाए थे। इन आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने सभी बिजली कंपनियों को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

जिलेवार गुणवत्ता परीक्षण भी होगा अनिवार्य

आयोग ने केवल राज्य स्तर की रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जिले के आधार पर अलग-अलग एक्यूरेसी टेस्ट और गुणवत्ता परीक्षण का विवरण भी मांगा है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि विभिन्न क्षेत्रों में लगाए गए स्मार्ट मीटर निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं या नहीं। आयोग का मानना है कि इस प्रक्रिया से उपभोक्ताओं की शिकायतों की निष्पक्ष समीक्षा संभव होगी।

छोटे कारोबार करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्रस्ताव तैयार होगा

सुनवाई के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में अपने घरों से छोटी दुकान या सीमित व्यापार संचालित करने वाले उपभोक्ताओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। वर्तमान व्यवस्था में ऐसे उपभोक्ताओं को घरेलू बिजली कनेक्शन पर व्यापारिक गतिविधि की अनुमति नहीं है, जिसके कारण कई मामलों में उन पर बिजली चोरी जैसी कार्रवाई भी की जाती है। आयोग ने इस विषय पर पावर कॉरपोरेशन को तीन महीने के भीतर विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

लाखों उपभोक्ताओं को मिल सकती है राहत

बताया जा रहा है कि इस फैसले का असर राज्य के लगभग 35 से 40 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। यदि प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो घर से छोटे स्तर पर कारोबार करने वाले लोगों को कानूनी स्पष्टता मिलेगी और अनावश्यक कार्रवाई की आशंका भी कम होगी। आयोग इससे पहले भी इस संबंध में प्रस्ताव मांग चुका था, लेकिन निर्धारित समय में कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई थी।

बिजली व्यवस्था की समीक्षा के भी दिए निर्देश

उपभोक्ता परिषद की ओर से बिजली वितरण प्रणाली की वर्टिकल व्यवस्था और कर्मचारियों की उपलब्धता का मुद्दा भी उठाया गया था। आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को निर्देश दिया है कि पूरी व्यवस्था का स्वतंत्र और पेशेवर एजेंसी से मूल्यांकन कराया जाए। साथ ही उपकेंद्रों और फीडर स्तर पर नियमित तथा संविदा कर्मचारियों की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि रखरखाव और उपभोक्ता सेवाओं में सुधार लाया जा सके।

मानव संसाधन मानकों के पालन पर रहेगा जोर

आयोग ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2019 में तय किए गए मानव संसाधन मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए। प्रत्येक फीडर पर आवश्यक संख्या में कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने से बिजली आपूर्ति व्यवस्था अधिक जवाबदेह और भरोसेमंद बन सकेगी। इससे उपभोक्ताओं को शिकायतों के समाधान में भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

1912 हेल्पलाइन पर शिकायत निस्तारण में लापरवाही पर नाराजगी

उपभोक्ताओं की शिकायतों के लिए संचालित 1912 हेल्पलाइन पर दर्ज मामलों के निस्तारण में कथित लापरवाही को लेकर भी आयोग ने असंतोष जताया है। आयोग के अनुसार शिकायतों के पारदर्शी और प्रभावी समाधान की व्यवस्था पर रिपोर्ट पहले ही मांगी जा चुकी थी, लेकिन अब तक इसे उपलब्ध नहीं कराया गया। लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए आयोग ने तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं और चेतावनी दी है कि आदेशों की अनदेखी होने पर विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 142 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

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