उत्तराखण्ड

CyberCrime – उत्तराखंड में बढ़े ऑनलाइन ठगी के मामले, गंभीर अपराध घटे…

CyberCrime – नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की नई रिपोर्ट में उत्तराखंड में अपराध के बदलते स्वरूप की तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में पारंपरिक अपराधों में कमी दर्ज की गई है, जबकि साइबर अपराध तेजी से बढ़ते हुए नई चुनौती बनकर उभरे हैं। खासतौर पर ऑनलाइन ठगी और डिजिटल माध्यम से होने वाले वित्तीय अपराधों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में साइबर अपराध के मामलों में करीब 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इनमें सबसे अधिक मामले ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार कुल साइबर अपराधों में लगभग 70 प्रतिशत मामले लोगों से डिजिटल माध्यम से पैसे ठगने के हैं। पुलिस विभाग का कहना है कि साइबर अपराधों को गंभीरता से लेते हुए उनकी रिपोर्टिंग और जांच को प्राथमिकता दी जा रही है।

ऑनलाइन ठगी बनी सबसे बड़ी चुनौती

पिछले कुछ वर्षों में इंटरनेट और डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों में भी तेजी आई है। उत्तराखंड में भी अब फर्जी कॉल, लिंक भेजकर बैंक जानकारी हासिल करना और ऑनलाइन निवेश के नाम पर धोखाधड़ी जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार राज्य में साइबर हेल्पलाइन और विशेष जांच इकाइयों को मजबूत किया गया है, ताकि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की जा सके। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कई मामलों का समय रहते खुलासा करने में उत्तराखंड पुलिस अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

महिला अपराध के मामलों में आई कमी

एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में राज्य में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में ऐसे मामलों में लगभग 1.5 प्रतिशत की कमी आई। पुलिस विभाग का मानना है कि महिला हेल्प डेस्क, त्वरित कार्रवाई और जागरूकता अभियानों का असर इस बदलाव में देखने को मिला है।

राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने महिला सुरक्षा को लेकर पिछले कुछ समय में कई स्तरों पर अभियान चलाए हैं। सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी बढ़ाने और शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया आसान बनाने से भी मदद मिली है।

हत्या और लूट जैसे अपराधों में गिरावट

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि हत्या, डकैती और लूट जैसे गंभीर अपराधों में कमी आई है। वर्ष 2024 में इन अपराधों में करीब 2.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराधियों के खिलाफ लगातार चलाए गए विशेष अभियान और निगरानी व्यवस्था मजबूत होने से इसका सकारात्मक असर पड़ा है।

राज्यभर में कानून व्यवस्था को लेकर की गई सख्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाने को भी इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। पुलिस का दावा है कि गंभीर अपराधों की रोकथाम के लिए तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लगातार मजबूत की जा रही है।

स्मार्ट पुलिसिंग में उत्तराखंड आगे

डिजिटल पुलिसिंग और डेटा प्रबंधन के क्षेत्र में भी उत्तराखंड ने बेहतर प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट के अनुसार ‘वन डाटा वन एंट्री’ प्रणाली और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन में राज्य ने देशभर में सबसे अधिक 93.46 अंक हासिल किए हैं।

सीसीटीएनएस और इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के प्रभावी उपयोग में उत्तराखंड ने कई बड़े राज्यों को पीछे छोड़ा है। पुलिस विभाग का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने से लेकर चार्जशीट दाखिल होने तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल करने से काम में पारदर्शिता और तेजी आई है।

तकनीक के साथ बढ़ी जिम्मेदारी

विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिक निर्भर हो रहे हैं, वैसे-वैसे साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता भी जरूरी होती जा रही है। पुलिस विभाग लोगों से अनजान लिंक, फर्जी कॉल और ऑनलाइन निवेश के नाम पर मिलने वाले प्रस्तावों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है।

रिपोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि उत्तराखंड में अपराध का स्वरूप बदल रहा है और अब पारंपरिक अपराधों के साथ डिजिटल अपराधों पर भी उतनी ही गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।

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