GlacierRisk – मध्य हिमालय में अस्थिर ग्लेशियरों से बढ़ा खतरे का अंदेशा
GlacierRisk – मध्य हिमालय के ऊंचे इलाकों में स्थित अस्थिर ग्लेशियरों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। हाल के वैज्ञानिक अध्ययन और उपग्रह चित्रों के आधार पर यह आशंका जताई गई है कि इन ग्लेशियरों के खिसकने या टूटने की स्थिति में बड़े पैमाने पर हिमस्खलन हो सकता है। इस संभावित खतरे को गंभीर मानते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने केंद्र सरकार समेत कई संबंधित संस्थाओं से जवाब तलब किया है।

अध्ययन के आधार पर उठे सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान अधिकरण ने एक प्रकाशित रिपोर्ट का संज्ञान लिया, जिसमें बताया गया था कि पर्वतीय ढलानों पर मौजूद कुछ ग्लेशियर अस्थिर स्थिति में हैं। यदि इनमें हलचल होती है तो इससे नीचे बसे क्षेत्रों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे हिमस्खलन केवल ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनका प्रभाव दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच सकता है, जिससे जान-माल का नुकसान होने की आशंका रहती है।
उपग्रह आंकड़ों से मिला संकेत
अधिकरण की पीठ ने बताया कि आधुनिक तकनीक के जरिए इस खतरे का आकलन किया गया है। उपग्रह छवियों और डिजिटल मॉडल के माध्यम से यह देखा गया कि हिमस्खलन की स्थिति में बर्फ और मलबा किस दूरी तक पहुंच सकता है।
इन अध्ययनों में उत्तराखंड के माणा, बदरीनाथ और हनुमान चट्टी जैसे क्षेत्रों को संवेदनशील बताया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि सबसे खराब स्थिति में इन स्थानों तक इसका असर पहुंच सकता है।
केंद्र और एजेंसियों को नोटिस
मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकरण ने कई प्रमुख संस्थाओं को नोटिस जारी किया है। इसमें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ अन्य संबंधित निकायों को भी शामिल किया गया है।
सभी पक्षों को निर्देश दिया गया है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
पर्यावरणीय जोखिम पर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान का असर ग्लेशियरों की स्थिरता पर पड़ रहा है। इससे इन क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है।
ऐसे में समय रहते निगरानी और रोकथाम के उपाय करना जरूरी है, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके। इस दिशा में वैज्ञानिकों और प्रशासन के बीच समन्वय अहम माना जा रहा है।
वायरल वीडियो को लेकर पुलिस की सफाई
इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो को लेकर भ्रम की स्थिति भी बनी रही। इस वीडियो को बदरीनाथ के एक कुंड से जोड़कर साझा किया जा रहा था।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह वीडियो संबंधित स्थल का नहीं है। जांच में पाया गया कि इसे गलत तरीके से जोड़कर प्रसारित किया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा है कि भ्रामक जानकारी फैलाने वालों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
आगे की कार्रवाई पर नजर
पूरे मामले में अब सभी की नजर अधिकरण की अगली सुनवाई पर टिकी है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट और संबंधित एजेंसियों के जवाब के आधार पर आगे की रणनीति तय होगी।
यह मामला केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते पर्यावरणीय जोखिमों की ओर संकेत करता है। ऐसे में समय रहते उचित कदम उठाना आवश्यक माना जा रहा है।