HeatwaveImpact – उत्तराखंड में भीषण गर्मी में जारी है बीमार बाघों का इलाज
HeatwaveImpact – उत्तराखंड में इस साल समय से पहले बढ़ी गर्मी का असर अब जंगलों तक साफ दिखाई देने लगा है। लगातार बढ़ते तापमान और जल स्रोतों के घटने के कारण वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। हाल ही में वन विभाग द्वारा बचाए गए कुछ बाघों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण पाए गए हैं, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, यह केवल एक isolated घटना नहीं बल्कि बदलते मौसम का व्यापक असर भी हो सकता है।

गर्मी के कारण बिगड़ी बाघों की हालत
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिन बाघों को रेस्क्यू किया गया, उनमें शरीर में पानी की कमी और अत्यधिक गर्मी के प्रभाव के संकेत मिले। सामान्य तौर पर बाघ विभिन्न मौसम परिस्थितियों को सहन कर लेते हैं, लेकिन लगातार ऊंचे तापमान और पर्याप्त पानी की अनुपलब्धता उनके लिए जोखिम पैदा कर देती है। कई मामलों में यह देखा गया है कि घायल या कमजोर बाघ लंबे समय तक धूप में पड़े रहते हैं, जिससे उनकी स्थिति और खराब हो जाती है।
रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शुरू हुआ उपचार
तराई क्षेत्र में हाल ही में चार बाघों को अलग-अलग स्थानों से सुरक्षित निकाला गया था। इन बाघों में चोट के निशान के साथ-साथ हीट स्ट्रोक के लक्षण भी पाए गए। इनमें से एक बाघ की हालत ज्यादा गंभीर थी और उसकी मृत्यु हो चुकी है, जबकि अन्य तीन को बेहतर देखभाल के लिए कॉर्बेट के रेस्क्यू सेंटर में रखा गया है। वहां उनकी लगातार निगरानी की जा रही है और विशेषज्ञों की टीम उपचार में लगी हुई है।
इलाज के लिए अपनाए गए विशेष उपाय
बाघों की स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने इलाज में कुछ विशेष तरीके अपनाए हैं। उन्हें शरीर में पानी और ऊर्जा की कमी दूर करने के लिए ग्लूकोज दिया जा रहा है। इसके साथ ही विशेष रूप से तैयार आइसक्रीम खिलाई जा रही है, जिसमें इलेक्ट्रोलाइट्स और आवश्यक दवाएं मिलाई गई हैं। यह उपाय शरीर का तापमान संतुलित रखने और तेजी से रिकवरी में मदद करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा और जल स्रोतों में कमी बनी रही, तो जंगलों में रहने वाले जानवरों के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। खासतौर पर मांसाहारी जीवों को अधिक ऊर्जा और पानी की आवश्यकता होती है, जो इस तरह की परिस्थितियों में प्रभावित होती है। इसलिए वन क्षेत्रों में जल स्रोतों को बनाए रखना और उनकी निगरानी करना जरूरी हो गया है।
मौसम बदलाव से उम्मीद
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बारिश की संभावना जताई है, जिससे तापमान में गिरावट आ सकती है। इससे न सिर्फ आम लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि वन्यजीवों के लिए भी परिस्थितियां बेहतर हो सकती हैं। फिलहाल वन विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित बाघों को स्वस्थ करने के लिए हर जरूरी कदम उठा रहा है।