उत्तराखण्ड

HospitalSafety – देहरादून अग्निकांड के बाद निजी अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई

HospitalSafety – देहरादून के पैनेसिया अस्पताल में हुए अग्निकांड के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की कार्यप्रणाली की व्यापक जांच शुरू कर दी है। हादसे में प्रभावित मरीजों का उपचार फिलहाल शहर के अलग-अलग अस्पतालों में जारी है। प्रशासन का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा और अस्पतालों में जरूरी व्यवस्थाओं की निगरानी अब और सख्ती से की जाएगी।

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अस्पताल में लगी आग के बाद जिन मरीजों को सुरक्षित निकाला गया था, उनमें से कई को कैलाश अस्पताल और कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों के अनुसार कैलाश अस्पताल में भर्ती चार मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। बाकी मरीजों की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग लगातार उनकी निगरानी कर रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा ने दोनों अस्पतालों के प्रबंधन से मरीजों की स्थिति की जानकारी ली। कैलाश अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गंभीर मरीजों का उपचार कर रही है और हर स्थिति पर नजर रखी जा रही है। विभाग ने अस्पतालों से नियमित रिपोर्ट भी मांगी है।

पैनेसिया अस्पताल में आग लगने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने राजधानी में संचालित निजी अस्पतालों और क्लीनिकों का निरीक्षण अभियान शुरू किया। अधिकारियों का कहना है कि कई संस्थानों में नियमों की अनदेखी और सुरक्षा मानकों की कमी की शिकायतें सामने आ रही थीं।

तीन अस्पतालों को कराया गया बंद

गुरुवार को एसीएमओ डॉ. प्रदीप कुमार के नेतृत्व में एक टीम ने शहर के कई निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान तीन अस्पताल बिना वैध पंजीकरण के संचालित होते पाए गए। इनमें सुभाष नगर स्थित एक हेल्थ सेंटर, जोगीवाला का एक आयुष अस्पताल और बंजारावाला रोड स्थित दून मेडिसिटी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि इनमें से एक अस्पताल के पास फायर एनओसी भी नहीं थी। तीनों संस्थानों को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया गया।

इसके अलावा कुछ पंजीकृत अस्पतालों में भी गंभीर लापरवाही सामने आई। निरीक्षण के दौरान कई अस्पतालों में डॉक्टर मौजूद नहीं मिले, जबकि वहां मरीज भर्ती थे। स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीर मामला मानते हुए संबंधित अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी किए हैं।

डॉक्टरों की गैरमौजूदगी पर सवाल

रिस्पना पुल के पास स्थित एक अस्पताल में जांच के दौरान कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। यहां भर्ती मरीजों की देखभाल केवल स्टाफ नर्सों के भरोसे की जा रही थी। विभाग ने पाया कि कुछ कर्मचारी संबंधित परिषद में पंजीकृत भी नहीं थे। इसी तरह शिमला बाईपास और रिंग रोड क्षेत्र के अस्पतालों में भी चिकित्सकीय निगरानी में कमी पाई गई।

स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित अस्पतालों को तीन दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। अधिकारियों का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

फायर सेफ्टी को लेकर अस्पताल अलर्ट

अग्निकांड के बाद दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रशासन ने भी सुरक्षा उपाय बढ़ा दिए हैं। अस्पताल में एसी का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से नीचे न रखने का निर्देश जारी किया गया है ताकि बिजली पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। इसके साथ ही अस्पताल परिसर में फायर सेफ्टी मॉक ड्रिल कराई गई और लंबित सुरक्षा कार्यों को जल्द पूरा करने के आदेश दिए गए हैं।

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