JusticeCase – एंजेल चकमा हत्याकांड में पुलिस रिपोर्ट पर उठे नए सवाल
JusticeCase – देहरादून के चर्चित एंजेल चकमा हत्याकांड में पुलिस की नई रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) को सौंपी गई रिपोर्ट में देहरादून पुलिस ने कहा है कि मामले में शामिल छह आरोपियों में से कोई भी अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंधित नहीं है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान नस्लीय टिप्पणी से जुड़े ठोस साक्ष्य नहीं मिले, इसलिए आरोपपत्र में ऐसे किसी आरोप को शामिल नहीं किया गया।

जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद चकमा स्टूडेंट यूनियन और अन्य संगठनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठनों का आरोप है कि शुरुआती स्तर पर जांच को गलत दिशा में ले जाया गया, जिससे मामले की संवेदनशीलता प्रभावित हुई। उनका कहना है कि अब तक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होना भी जांच एजेंसियों की बड़ी विफलता मानी जा रही है।
जांच में नस्लीय टिप्पणी के प्रमाण नहीं मिलने का दावा
देहरादून पुलिस के अनुसार, विवेचना के दौरान ऐसा कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि आरोपियों ने पीड़ित के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी की थी। एसपी देहात पंकज गैरोला ने बताया कि उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य तथ्यों की जांच के बाद ही चार्जशीट तैयार की गई है। इसी आधार पर अदालत में दाखिल आरोपपत्र में नस्लीय उत्पीड़न से जुड़ी धाराएं शामिल नहीं की गईं।
हालांकि, इस दावे को लेकर छात्र संगठनों और पीड़ित परिवार के समर्थकों ने असहमति जताई है। उनका कहना है कि घटना के तुरंत बाद सामने आए बयानों और परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए था। याचिकाकर्ताओं ने आयोग के समक्ष यह भी कहा कि मामले की जांच शुरुआत से अधिक संवेदनशील तरीके से होनी चाहिए थी।
मुख्य आरोपी अब भी फरार, दो नाबालिग जमानत पर बाहर
मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर सबसे अधिक चिंता मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी न होने को लेकर जताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी यश राज अवस्थी देश छोड़कर नेपाल भाग गया है। उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है और रेड नोटिस जारी कराने की तैयारी की जा रही है।
इधर, मामले में शामिल दो नाबालिग आरोपियों को किशोर न्याय बोर्ड से जमानत मिल चुकी है। इस फैसले को लेकर भी पीड़ित पक्ष ने नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि गंभीर अपराध से जुड़े आरोपियों को इतनी जल्दी राहत मिलना न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। आयोग के समक्ष हुई सुनवाई में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया।
घटना के बाद परिवार अब भी सदमे में
यह मामला पिछले वर्ष दिसंबर में सामने आया था। त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के रहने वाले एंजेल चकमा और उनके छोटे भाई माइकल पर देहरादून के सेलाकुई इलाके में कथित रूप से हमला किया गया था। घटना में गंभीर रूप से घायल एंजेल का इलाज के दौरान 26 दिसंबर 2025 को निधन हो गया था।
एंजेल के पिता तरुण चकमा, जो त्रिपुरा में सुरक्षा बल में तैनात हैं, ने बेटे की मौत को परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि एंजेल पढ़ाई में बेहद होनहार था और उसे एक प्रतिष्ठित कंपनी से नौकरी का प्रस्ताव भी मिला था। परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द ही करियर की नई शुरुआत करेगा, लेकिन इससे पहले ही यह दुखद घटना हो गई।
छोटे भाई ने छोड़ी पढ़ाई और शहर
परिवार के अनुसार, घटना का सबसे गहरा असर एंजेल के छोटे भाई माइकल पर पड़ा है। माइकल उसी शहर में पढ़ाई कर रहा था, लेकिन भाई की मौत के बाद वह मानसिक रूप से टूट गया। परिवार ने बताया कि लगातार तनाव और डर के कारण उसने देहरादून छोड़ दिया है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर छात्र सुरक्षा, बाहरी राज्यों से आने वाले युवाओं की स्थिति और संवेदनशील मामलों की निष्पक्ष जांच को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें पुलिस की आगे की कार्रवाई और मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी पर टिकी हैं।