KedarnathSecurity – धाम में व्यवस्था सख्त, संदिग्धों पर नजर रखने के मिले निर्देश
KedarnathSecurity – केदारनाथ धाम में बढ़ती भीड़ और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने सोमवार को पुलिस विभाग को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए, ताकि धाम की गरिमा और सुरक्षा बनी रहे। इसके साथ ही मंदिर परिसर के आसपास बैठने वाले साधुओं के स्थान को लेकर भी नई व्यवस्था लागू की गई है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने और धाम की पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पिछले कुछ दिनों में धाम की व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया गया है और जो कमियां सामने आईं, उन्हें सुधारने का प्रयास किया गया है। इसी क्रम में पुलिस को निर्देश दिया गया है कि साधु-संतों के वेश में आने वाले संदिग्ध लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाए। इसके लिए ऑपरेशन कालनेमि नाम से विशेष अभियान शुरू किया गया है। प्रशासन का मानना है कि इस तरह की निगरानी से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और श्रद्धालुओं का भरोसा भी कायम रहेगा।
मंदिर परिसर में भिक्षावृत्ति पर रोक
धाम के मुख्य परिसर में भिक्षावृत्ति को लेकर भी प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों के अनुसार, मंदिर के सामने बैठकर भीख मांगने की प्रवृत्ति बढ़ रही थी, जो इस पवित्र स्थल की गरिमा के अनुकूल नहीं है। ऐसे में साधुओं को निर्धारित स्थान पर बैठने के लिए कहा गया है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की निगरानी में अब उन्हें भीम शिला के पास तय क्षेत्र में व्यवस्थित किया जा रहा है, ताकि मंदिर परिसर साफ-सुथरा और व्यवस्थित बना रहे।
चारधाम यात्रा में बढ़ता कचरा बना चुनौती
चारधाम यात्रा के आरंभ होते ही पर्यावरण से जुड़ी चिंताएं भी सामने आने लगी हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ-साथ कचरे की मात्रा में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। शुरुआती दिनों में ही चारों धामों को मिलाकर प्रतिदिन लगभग 350 कुंतल कचरा निकलने की बात सामने आई है। यह स्थिति हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण संतुलन के लिए चिंता का विषय बन रही है।
विभिन्न धामों में कचरे के आंकड़े चिंताजनक
सफाई व्यवस्था के आंकड़ों पर नजर डालें तो बदरीनाथ में रोजाना करीब 1700 किलो कचरा इकट्ठा हो रहा है। यहां अब तक लगभग साढ़े तीन टन कचरा जमा किया जा चुका है, जिसमें प्लास्टिक की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। केदारनाथ में प्रतिदिन करीब 350 किलो कचरा निकल रहा है, जिसमें धाम और पैदल मार्ग दोनों शामिल हैं। गंगोत्री में अब तक 5.50 टन और यमुनोत्री में लगभग 10 टन कचरा एकत्र किया जा चुका है। इन आंकड़ों से साफ है कि यात्रा के साथ सफाई की चुनौती लगातार बढ़ रही है।
प्लास्टिक कचरे पर उठे सवाल
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रा मार्गों पर प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग गंभीर समस्या बनता जा रहा है। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के बावजूद, इसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, रेनकोट, पानी की बोतलें और पैकेज्ड खाद्य सामग्री के रैपर न केवल दृश्य प्रदूषण बढ़ा रहे हैं, बल्कि दीर्घकालिक पर्यावरणीय नुकसान का कारण भी बन सकते हैं।
प्रबंधन के दावों और जमीनी स्थिति में अंतर
हालांकि प्रशासन का दावा है कि कचरा प्रबंधन पहले की तुलना में बेहतर और वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है। बदरीनाथ और केदारनाथ में आधुनिक मशीनों और कंपोस्टिंग सुविधाओं का उपयोग किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार, केदारनाथ में लगभग 80 प्रतिशत कचरे का निस्तारण किया जा रहा है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी ऊंचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में पूरी तरह से कचरे का प्रबंधन करना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।