PowerCrisis – उत्तराखंड में भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट गहराया
PowerCrisis – उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली संकट ने आम लोगों से लेकर उद्योगों तक की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य के कई हिस्सों में लगातार बिजली कटौती की जा रही है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने भी माना है कि मौजूदा हालात 30 अप्रैल तक बने रह सकते हैं। हालांकि, विभाग का कहना है कि एक मई से स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।

बिजली आपूर्ति में कमी से बढ़ी परेशानी
अप्रैल महीने की शुरुआत में ही बिजली उत्पादन और आपूर्ति में गिरावट दर्ज की गई। जल विद्युत उत्पादन में लगभग 100 मेगावाट की कमी आई, वहीं केंद्रीय पूल से मिलने वाली करीब 150 मेगावाट बिजली भी घट गई। इसके अलावा समय पर अतिरिक्त बिजली खरीद की मंजूरी नहीं मिलने से संकट और गहरा गया। नतीजा यह रहा कि राज्य के कई क्षेत्रों में लंबी अवधि तक बिजली कटौती करनी पड़ी।
उद्योगों और ग्रामीण इलाकों पर सबसे ज्यादा असर
बिजली संकट का सबसे अधिक असर औद्योगिक इकाइयों और ग्रामीण क्षेत्रों पर देखा जा रहा है। फर्नेस आधारित उद्योगों में 12 से 13 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने की शिकायतें सामने आई हैं। वहीं ग्रामीण इलाकों में रोजाना चार से छह घंटे तक बिजली नहीं मिल रही है। छोटे शहरों में भी दो से चार घंटे की कटौती आम हो गई है, जिससे लोगों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
उत्पादन में कमी और बढ़ती मांग बनी वजह
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, इस संकट के पीछे कई कारण हैं। गैस की ऊंची कीमतों के चलते 321 मेगावाट क्षमता वाला गैस आधारित पावर प्लांट बंद पड़ा है। दूसरी ओर, नदियों में जलस्तर कम होने से हाइड्रो पावर उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। इसी बीच बढ़ते तापमान और इलेक्ट्रिक उपकरणों के अधिक उपयोग के कारण बिजली की मांग में करीब पांच प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का भी असर
यूपीसीएल के मुताबिक वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव, खासकर ईरान और अमेरिका के बीच स्थिति, ऊर्जा आपूर्ति पर अप्रत्यक्ष असर डाल रही है। गैस की कमी के चलते वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता बढ़ी है, जिससे बिजली की मांग और बढ़ गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग में बढ़ोतरी भी इस दबाव को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल है।
उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील
यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक जीएस बुदियाल ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे 30 अप्रैल तक सहयोग बनाए रखें। उनका कहना है कि अचानक बढ़ी मांग और सीमित आपूर्ति के कारण यह स्थिति बनी है। विभाग द्वारा लोड प्रबंधन लागू किया गया है और अतिरिक्त बिजली खरीदने के प्रयास भी जारी हैं।
मई से राहत मिलने की उम्मीद
राज्य सरकार ने केंद्र से अतिरिक्त बिजली कोटा देने का अनुरोध किया है। संभावना है कि मई और जून के दौरान उत्तराखंड को करीब 193-193 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलेगी। इसके अलावा अतिरिक्त 150 मेगावाट की आपूर्ति का भी आश्वासन मिला है। ऊर्जा विभाग के अनुसार मई महीने में चरणबद्ध तरीके से अतिरिक्त बिजली खरीद की अनुमति भी मिल गई है, जिससे स्थिति में सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है।