अंतर्राष्ट्रीय

NATO – अमेरिकी सैनिकों पर ट्रंप के संकेत के बीच सतर्क हुआ जर्मनी

NATO – जर्मनी ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका द्वारा सैनिकों की तैनाती में संभावित बदलाव की स्थिति के लिए तैयार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी में मौजूद अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम करने के संकेत दिए हैं। ट्रंप की टिप्पणी के बाद यूरोपीय सुरक्षा और नाटो सहयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने कहा कि उनकी सरकार इस पूरे मुद्दे पर अमेरिका और नाटो सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क में है। उन्होंने भरोसा जताया कि किसी भी निर्णय से पहले सहयोगी देशों के बीच उचित बातचीत और समन्वय किया जाएगा।

नाटो सहयोग को लेकर जर्मनी का रुख स्पष्ट

मोरक्को यात्रा के दौरान मीडिया से बातचीत में वाडेफुल ने कहा कि जर्मनी नाटो और ट्रांसअटलांटिक साझेदारी को मजबूत बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर नाटो के विभिन्न मंचों पर गंभीर और भरोसेमंद चर्चा चल रही है।

जर्मन सरकार का कहना है कि अमेरिका और यूरोप के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से वैश्विक सुरक्षा का अहम हिस्सा रहा है। इसलिए किसी भी बदलाव को सहयोगी देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए देखा जाएगा।

सैनिकों की संख्या घटाने का मुद्दा नया नहीं

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती को लेकर चर्चा कोई नई बात नहीं है। उनके मुताबिक, पहले भी अलग-अलग अमेरिकी प्रशासन के दौरान इस तरह की संभावनाएं सामने आती रही हैं।

उन्होंने जर्मनी स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों की रणनीतिक अहमियत पर जोर दिया। विशेष रूप से रामस्टीन एयर बेस का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूरोप और नाटो की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण केंद्र है।

ट्रंप और जर्मन नेतृत्व के बीच बढ़ा तनाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में कहा था कि ईरान मुद्दे पर जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ मतभेद के बाद अमेरिका सैनिकों की तैनाती की समीक्षा कर सकता है। ट्रंप का आरोप था कि जर्मन नेतृत्व ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्थिति को सही तरीके से नहीं समझ रहा है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर भी इस विषय को उठाया और संकेत दिए कि कुछ सैनिकों को वापस बुलाने या अन्य स्थानों पर तैनात करने पर विचार किया जा सकता है।

जर्मनी ने बनाए रखा संतुलित रुख

हालांकि जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने इस पूरे विवाद पर सीधे प्रतिक्रिया देने से बचते हुए कहा कि जर्मनी का ध्यान मजबूत नाटो और स्थिर अंतरराष्ट्रीय साझेदारी पर है। उन्होंने कहा कि बर्लिन लगातार वाशिंगटन और अन्य सहयोगी देशों के संपर्क में बना हुआ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और यूरोप के बीच रक्षा सहयोग को लेकर समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे हैं, लेकिन दोनों पक्ष सुरक्षा साझेदारी को बनाए रखने के पक्ष में दिखाई देते हैं।

इस घटनाक्रम के बीच यह भी माना जा रहा है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान को लेकर अमेरिकी नीति आने वाले समय में नाटो देशों के बीच रणनीतिक चर्चाओं को और तेज कर सकती है।

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