उत्तर प्रदेश

SmartMeter – स्मार्ट मीटर रिपोर्ट के बाद खपत आंकड़ों पर उठे नए सवाल

SmartMeter – उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। राज्य सरकार को सौंपी गई चार सदस्यीय समिति की अंतरिम रिपोर्ट में स्मार्ट मीटरों को तकनीकी रूप से सही बताया गया है। हालांकि अब बिजली कंपनियों के ही आंकड़ों के आधार पर इस रिपोर्ट पर सवाल उठने लगे हैं। विभिन्न वितरण निगमों की ओर से नियामक आयोग को दिए गए आंकड़ों में यह स्वीकार किया गया है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं की बिजली खपत दर्ज होने में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

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यही वजह है कि उपभोक्ता संगठनों और कई उपभोक्ताओं ने मीटरों की सटीकता को लेकर दोबारा जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि मीटर सही हैं तो खपत के आंकड़ों में अचानक इतनी वृद्धि क्यों दर्ज हुई।

वितरण कंपनियों के आंकड़ों से बढ़ी चर्चा

बिजली दरों की सुनवाई के दौरान नियामक आयोग ने सभी वितरण निगमों से स्मार्ट मीटर लगने से पहले और बाद की खपत का तुलनात्मक डेटा मांगा था। कंपनियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में कई क्षेत्रों में बिजली खपत बढ़ने की बात सामने आई।

सबसे अधिक वृद्धि पश्चिमांचल क्षेत्र में दर्ज की गई, जहां प्रति उपभोक्ता औसतन करीब 100 यूनिट अधिक खपत सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, यहां स्मार्ट मीटर लगने के बाद लगभग 84 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज हुई। वहीं पूर्वांचल और दक्षिणांचल क्षेत्रों में भी खपत बढ़ने की जानकारी दी गई। मध्यांचल में यह वृद्धि अपेक्षाकृत कम रही।

इन आंकड़ों के सार्वजनिक होने के बाद उपभोक्ता संगठनों ने सवाल उठाया कि यदि पहले की रीडिंग गलत नहीं थी, तो नई व्यवस्था में अचानक इतना अंतर कैसे आया।

मामला पहुंचा नियामक आयोग

स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता और रीडिंग को लेकर अब मामला नियामक आयोग तक पहुंच गया है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस संबंध में लोक महत्व याचिका दाखिल की है। परिषद ने मांग की है कि स्मार्ट मीटरों की स्वतंत्र तकनीकी जांच बेंगलुरु स्थित सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट से कराई जाए।

याचिका में कहा गया है कि विभागीय लैब में हुई जांच से उपभोक्ताओं की शंकाएं दूर नहीं हो पा रही हैं। परिषद का तर्क है कि स्वतंत्र एजेंसी की रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार जारी

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं और कई उपभोक्ताओं ने बिजली बिल अचानक बढ़ने की शिकायत की है। उनका कहना है कि अलग-अलग जिलों से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि स्मार्ट मीटर पहले की तुलना में अधिक रीडिंग दर्ज कर रहे हैं।

इसी मुद्दे को लेकर कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। इसके बाद सरकार ने जांच समिति गठित की थी, जिसने प्रारंभिक रिपोर्ट में मीटरों को सही बताया। हालांकि उपभोक्ता संगठन इस निष्कर्ष से संतुष्ट नहीं हैं।

पुरानी जांच रिपोर्ट का भी दिया गया हवाला

उपभोक्ता संगठनों ने वर्ष 2020 की जांच रिपोर्ट का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि उस समय कुछ मीटरों की तकनीकी जांच में कमियां सामने आई थीं। इसी आधार पर अब दोबारा स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है।

परिषद का कहना है कि केंद्र सरकार की मानक गाइडलाइन के अनुसार ऐसे मामलों में अधिकृत तकनीकी संस्थानों से ही परीक्षण कराया जाना चाहिए। इसलिए किसी अन्य संस्थान से जांच कराना निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना जाएगा।

सरकार की ओर से अंतिम रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल सरकार और बिजली विभाग की ओर से अंतिम जांच रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि अंतिम निष्कर्ष के बाद ही स्मार्ट मीटर परियोजना को लेकर आगे की रणनीति तय होगी। इस बीच उपभोक्ताओं की निगाहें नियामक आयोग और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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