राष्ट्रीय

Parole – गुरमीत राम रहीम को फिर मिली 30 दिन की अस्थायी रिहाई

Parole – डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर जेल से अस्थायी रिहाई मिल गई है। हरियाणा प्रशासन ने सोमवार को उसे 30 दिन की पैरोल मंजूर की। वर्ष 2020 के बाद यह 16वीं बार है जब राम रहीम को पैरोल या फरलो के जरिए जेल से बाहर आने की अनुमति दी गई है। वह वर्ष 2017 से रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है और दो साध्वियों से दुष्कर्म मामले में 20 साल की सजा काट रहा है।

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अब तक 400 से अधिक दिन जेल से बाहर

जेल विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार, राम रहीम अब तक अपनी सजा के करीब 3193 दिन पूरे कर चुका है। हालांकि इनमें से 406 दिन वह पैरोल और फरलो के चलते जेल से बाहर रहा। इसी वजह से हर बार उसकी अस्थायी रिहाई चर्चा का विषय बन जाती है। जेल रिकॉर्ड में उसे कैदी संख्या 8647/C के रूप में दर्ज किया गया है।

इस साल का पैरोल कोटा पूरा

हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स एक्ट, 2022 के तहत किसी भी कैदी को एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम 10 सप्ताह की पैरोल दी जा सकती है। यह अवधि अलग-अलग हिस्सों में ली जा सकती है। अधिकारियों के मुताबिक, राम रहीम को इस वर्ष जनवरी में 40 दिन की पैरोल दी गई थी। अब 30 दिन की नई पैरोल मिलने के बाद वर्ष 2026 के लिए तय पैरोल सीमा पूरी हो चुकी है।

फरलो का विकल्प अभी बाकी

कानूनी प्रावधानों के अनुसार, पैरोल की समय सीमा समाप्त होने के बावजूद राम रहीम के पास फरलो लेने का विकल्प अभी मौजूद है। नियमों के तहत फरलो अधिकतम तीन सप्ताह तक मिल सकती है और इसे अलग-अलग हिस्सों में नहीं बांटा जा सकता। जेल कानून में पैरोल और फरलो को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है।

पैरोल और फरलो में क्या अंतर

कानूनी जानकार बताते हैं कि पैरोल के दौरान जेल से बाहर बिताया गया समय सजा की कुल अवधि में शामिल नहीं किया जाता। दूसरी ओर, फरलो की अवधि को सजा का हिस्सा माना जाता है। यानी फरलो पर बिताया गया समय कैदी की सजा में गिना जाता है। वर्ष 2022 में लागू हुए नियमों के मुताबिक, जब कोई कैदी अपनी सजा का तीन-चौथाई हिस्सा पूरा कर लेता है, तब वह एक साथ चार सप्ताह की फरलो पाने का पात्र हो सकता है।

किन मामलों में हुई थी सजा

गुरमीत राम रहीम को वर्ष 2017 में सीबीआई की विशेष अदालत ने दो महिला अनुयायियों से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने उसे 20 साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद वर्ष 2019 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड और वर्ष 2021 में डेरा प्रबंधक रंजीत सिंह हत्या मामले में भी उसे उम्रकैद की सजा मिली थी।

कुछ मामलों में हाईकोर्ट से राहत

बाद के वर्षों में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने राम रहीम को कुछ मामलों में राहत दी। वर्ष 2024 में रंजीत सिंह हत्या मामले में और वर्ष 2026 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में उसे बरी कर दिया गया। हालांकि दुष्कर्म मामले में सुनाई गई सजा के चलते वह अभी भी जेल में बंद है और उसी मामले में सजा काट रहा है।

पैरोल मंजूरी के बाद एक बार फिर उसकी रिहाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि यह फैसला मौजूदा कानूनी प्रावधानों और जेल नियमों के अनुसार लिया गया है।

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