Seafarers – संघर्षग्रस्त समुद्री मार्गों में बढ़ी भारतीय नाविकों की चिंता
Seafarers – पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच समुद्री मार्गों पर काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता गहराती जा रही है। हाल के दिनों में भारतीय क्रू सदस्यों वाले कई जहाज हमलों की चपेट में आए हैं, जिनमें कुछ भारतीय नागरिकों की जान भी गई है। इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा व्यवस्था और जोखिम भरे समुद्री क्षेत्रों में उनकी स्थिति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

हालिया घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
बीते सप्ताह के दौरान भारतीय क्रू वाले कई वाणिज्यिक जहाजों पर हमले होने की खबरें सामने आईं। इनमें एक तेल टैंकर पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मृत्यु हो गई। मृतकों का संबंध हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश से बताया गया है।
इन घटनाओं के बाद समुद्री क्षेत्र में कार्यरत भारतीयों के परिवारों और समुद्री संगठनों ने सुरक्षा उपायों को लेकर चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्ष प्रभावित समुद्री मार्गों में जहाजों की आवाजाही लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।
वैश्विक शिपिंग में अहम भूमिका निभाते हैं भारतीय
अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग में भारतीय नाविकों की महत्वपूर्ण भागीदारी है। भारत को दुनिया के प्रमुख समुद्री मानव संसाधन प्रदाताओं में गिना जाता है। विभिन्न उद्योग रिपोर्टों के अनुसार, वैश्विक मर्चेंट नेवी कार्यबल में भारतीय पेशेवरों की हिस्सेदारी उल्लेखनीय है।
वर्तमान समय में तीन लाख से अधिक भारतीय नाविक विभिन्न अंतरराष्ट्रीय कंटेनर जहाजों, तेल टैंकरों और मालवाहक पोतों पर कार्यरत हैं। उनकी तकनीकी दक्षता, पेशेवर प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने की क्षमता के कारण वैश्विक शिपिंग कंपनियां भारतीय कर्मचारियों को प्राथमिकता देती हैं।
युवाओं के लिए आकर्षक करियर विकल्प
समुद्री क्षेत्र लंबे समय से भारतीय युवाओं के लिए आकर्षक रोजगार विकल्प बना हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह बेहतर आय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने का अवसर माना जाता है।
विदेशी जहाजों पर कार्यरत नाविकों को आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार वेतन मिलता है, जो कई अन्य शुरुआती पेशों की तुलना में अधिक हो सकता है। इसके अलावा लंबे समय तक विदेश में रहने की स्थिति में कुछ कर संबंधी लाभ भी उपलब्ध होते हैं। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में युवा समुद्री प्रशिक्षण संस्थानों का रुख करते हैं।
जोखिम भरे क्षेत्रों में काम करने की मजबूरी
समुद्री व्यापार का बड़ा हिस्सा ऐसे अंतरराष्ट्रीय मार्गों से होकर गुजरता है जो रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं। फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और लाल सागर जैसे क्षेत्रों में लगातार वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बनी रहती है।
इन मार्गों से गुजरने वाले जहाजों पर तैनात नाविकों के पास आमतौर पर यात्रा मार्ग चुनने का अधिकार नहीं होता। जहाज का रूट संबंधित शिपिंग कंपनी और संचालन प्रबंधन द्वारा तय किया जाता है। ऐसे में यदि कोई जहाज संवेदनशील या संघर्ष प्रभावित क्षेत्र से गुजरता है, तो क्रू को उसी के अनुरूप काम करना पड़ता है।
समुद्री संगठनों की पुरानी मांग
समुद्री कर्मचारी संगठनों और यूनियनों ने लंबे समय से यह मांग उठाई है कि नाविकों को अत्यधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में काम करने को लेकर अधिक अधिकार दिए जाएं। उनका तर्क है कि यदि किसी समुद्री मार्ग पर सुरक्षा संबंधी खतरा असाधारण रूप से बढ़ जाता है, तो क्रू सदस्यों को वहां जाने से इनकार करने का विकल्प मिलना चाहिए।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संबंध में एक समान और कठोर व्यवस्था अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है। यही वजह है कि कई बार नाविकों को संभावित खतरों के बावजूद अपनी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर बढ़ी बहस
हाल की घटनाओं ने वैश्विक शिपिंग उद्योग में सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर चर्चा तेज कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री व्यापार दुनिया की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है, लेकिन इसमें कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
भारतीय नाविकों की बड़ी संख्या को देखते हुए यह मुद्दा भारत के लिए भी महत्वपूर्ण बन गया है। आने वाले समय में समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और नाविकों के अधिकारों को लेकर नई चर्चाएं तेज होने की संभावना है।