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VaccinationDrive – जीरो डोज बच्चों तक पहुंच बढ़ाने पर स्वास्थ्य विभाग ने दिया जोर

VaccinationDrive – जनपद में ऐसे बच्चों को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम से जोड़ने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए गए हैं, जिन्हें अब तक एक भी टीका नहीं लग पाया है। इसी उद्देश्य से सोमवार को सिविल लाइन रोड स्थित एक रिसॉर्ट में जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य टीकाकरण से वंचित बच्चों की पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की रणनीति को और प्रभावी बनाना रहा।

zero dose children vaccination drive

कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने किया। यह कार्यक्रम गावी के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें जिले में लागू किए जा रहे जीरो डोज कार्ययोजना की समीक्षा और उसके बेहतर क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा हुई।

वंचित बच्चों की पहचान पर विशेष फोकस

कार्यशाला के दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों को ऐसे बच्चों की पहचान करने के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई, जिन्हें अब तक किसी भी प्रकार का नियमित टीकाकरण नहीं मिला है। इसके साथ ही उन परिवारों तक पहुंचने की रणनीतियों पर भी चर्चा हुई, जो विभिन्न कारणों से बच्चों का टीकाकरण नहीं करा पाए हैं।

विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर टीकाकरण बच्चों को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए प्रत्येक पात्र बच्चे तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है।

गांव स्तर पर अभियान चलाने के निर्देश

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने स्वास्थ्य कर्मियों से कहा कि कोई भी बच्चा जीवनरक्षक टीकों से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाने और ऐसे परिवारों से संवाद बढ़ाने पर जोर दिया जो किसी कारणवश टीकाकरण को लेकर संकोच या असहमति रखते हैं।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य केवल टीका लगाना नहीं, बल्कि लोगों में इसके महत्व के प्रति भरोसा और जागरूकता बढ़ाना भी है। नियमित संपर्क और समझाइश के माध्यम से टीकाकरण कवरेज को बेहतर बनाया जा सकता है।

वर्तमान स्थिति और चुनौतियों की समीक्षा

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एस.के. सिन्हा ने जिले में टीकाकरण की मौजूदा स्थिति की जानकारी साझा की। उन्होंने उन क्षेत्रों और समुदायों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई, जहां टीकाकरण कवरेज अपेक्षाकृत कम है।

बैठक में यह भी चर्चा की गई कि स्वास्थ्यकर्मी क्षेत्रीय स्तर पर डेटा संग्रह और निगरानी की प्रक्रिया को और मजबूत करें, ताकि किसी भी बच्चे के छूटने की संभावना कम हो सके। अधिकारियों ने नियमित समीक्षा और फील्ड स्तर पर निगरानी को अभियान की सफलता के लिए अहम बताया।

विशेषज्ञों ने साझा की कार्ययोजना

यूनिसेफ के मंडलीय समन्वयक बृजेन्द्र चौबे ने जीरो डोज बच्चों की पहचान, ट्रैकिंग और टीकाकरण कवरेज बढ़ाने के विभिन्न उपायों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि समुदाय आधारित प्रयासों और स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय से अधिक से अधिक बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि टीकाकरण कार्यक्रम की सफलता के लिए स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय प्रशासन और सहयोगी संस्थाओं के बीच निरंतर समन्वय आवश्यक है। इससे अभियान का प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई देगा।

विभिन्न विभागों के अधिकारी रहे मौजूद

कार्यशाला में उप जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. विपिन रंजन, डिप्टी सीएमओ डॉ. अश्वनी पांडेय, डीपीएम पूनम, डीसीपीएम डॉ. राजेश गुप्ता सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा विभिन्न ब्लॉकों के प्रभारी चिकित्साधिकारी, बीपीएम, बीसीपीएम, एआरओ तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।

अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से जिले में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम को और मजबूती मिलेगी तथा अधिक से अधिक बच्चों को समय पर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सकेगी।

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