Reservation – पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण व्यवस्था में बड़े बदलाव को मिली विधानसभा की मंजूरी
Reservation – पश्चिम बंगाल विधानसभा ने राज्य की अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण व्यवस्था में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दे दी है। नए विधायी बदलावों के बाद राज्य में OBC आरक्षण का प्रतिशत 17 से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही आरक्षण सूची में शामिल मान्य उपजातियों की संख्या 179 से घटकर 66 रह गई है। सरकार का कहना है कि यह फैसला न्यायालय के निर्देशों और वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप लिया गया है।

विधानसभा से पारित हुए दो संशोधन विधेयक
विधानसभा ने पिछड़ा वर्ग आरक्षण और पिछड़ा वर्ग आयोग से जुड़े दो संशोधन विधेयकों को मंजूरी दी। सरकार के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य आरक्षण व्यवस्था को मौजूदा कानूनी स्थिति के अनुरूप बनाना है। संशोधित व्यवस्था के तहत केवल उन्हीं उपजातियों को सूची में रखा गया है, जिनकी पहचान निर्धारित प्रक्रिया और आवश्यक जांच के आधार पर की गई थी।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदली व्यवस्था
यह संशोधन कलकत्ता हाईकोर्ट के वर्ष 2024 के उस फैसले के बाद सामने आया है, जिसमें वर्ष 2010 के बाद OBC सूची में जोड़ी गई कई श्रेणियों पर सवाल उठाए गए थे। अदालत ने अपने निर्णय में कहा था कि नई श्रेणियों को शामिल करने की प्रक्रिया संविधान और निर्धारित नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि पहले से आरक्षण का लाभ प्राप्त कर चुके लोगों के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।
OBC आरक्षण का पुराना ढांचा
पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण की शुरुआत वर्ष 1993 में हुई थी। उस समय सूची में कुल 66 उपजातियां शामिल थीं। बाद के वर्षों में तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने सामाजिक और आर्थिक आधार पर नई श्रेणियों को जोड़ते हुए आरक्षण का दायरा बढ़ाया। वर्ष 2010 में कई नई उपजातियों को सूची में शामिल किए जाने के बाद आरक्षण 7 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत कर दिया गया था।
बाद की सरकारों में हुआ विस्तार
वर्ष 2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस सरकार ने भी OBC सूची का विस्तार जारी रखा। सरकार का दावा था कि यह प्रक्रिया पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षणों के आधार पर अपनाई गई। हालांकि इस विस्तार को लेकर समय-समय पर कानूनी और राजनीतिक स्तर पर सवाल भी उठते रहे। आलोचकों का कहना था कि कुछ श्रेणियों को शामिल करने की प्रक्रिया पर्याप्त तथ्यात्मक आधार पर नहीं हुई।
सरकार ने फैसले का बताया आधार
विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री गौरीशंकर घोष ने कहा कि संशोधन का उद्देश्य किसी समुदाय के अधिकारों में कटौती करना नहीं है। उनके अनुसार केवल उन श्रेणियों को हटाया गया है, जिन्हें आवश्यक फील्ड सर्वेक्षण के बिना सूची में शामिल किया गया था। सरकार का कहना है कि भविष्य में किसी भी नई जाति या उपजाति को OBC सूची में शामिल करने का निर्णय केवल पिछड़ा वर्ग आयोग की विधिसम्मत सिफारिश के आधार पर लिया जाएगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया जारी
आरक्षण व्यवस्था में हुए इस बदलाव को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। जहां सरकार इसे कानूनी प्रक्रिया का पालन बता रही है, वहीं विपक्ष अपने-अपने तर्क सामने रख रहा है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर चर्चा जारी रहने की संभावना है। फिलहाल राज्य में OBC आरक्षण की नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।