ElectionCommission – देश में तेजी से बढ़ रही राजनीतिक दलों की संख्या, नए आंकड़ों ने खींचा ध्यान
ElectionCommission – भारत में राजनीतिक दलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। निर्वाचन आयोग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश में औसतन हर महीने तीन से अधिक नए राजनीतिक दल पंजीकरण के लिए आवेदन कर रहे हैं। वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में अब तक 21 नए संगठनों ने आयोग के समक्ष पंजीकरण का आवेदन दिया है। दूसरी ओर, निष्क्रिय दलों पर कार्रवाई भी जारी है, जिसके चलते कई ऐसे दलों का पंजीकरण समाप्त किया गया है जो लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया से दूर थे।

निष्क्रिय दलों पर आयोग की कार्रवाई
निर्वाचन आयोग ने पिछले वर्ष 345 गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द कर दिया था। आयोग के अनुसार, इन दलों ने लगातार छह वर्षों तक न तो किसी चुनाव में भाग लिया और न ही आवश्यक वित्तीय एवं संगठनात्मक विवरण उपलब्ध कराया। इस कार्रवाई के बाद भी देश में करीब 2500 गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दल मौजूद हैं, जिनमें से अधिकांश का सार्वजनिक स्तर पर सीमित राजनीतिक प्रभाव दिखाई देता है।
पश्चिम बंगाल के घटनाक्रम से बदला राजनीतिक समीकरण
हालिया राजनीतिक घटनाक्रम में पश्चिम बंगाल से जुड़ी एक अपेक्षाकृत कम चर्चित पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों के इस दल में शामिल होने और उसके बाद एनडीए को समर्थन देने की खबरों के चलते उसका राजनीतिक महत्व अचानक बढ़ गया। इससे पहले इस दल का संसद या विधानसभा में कोई प्रतिनिधित्व नहीं था, लेकिन नए घटनाक्रम ने उसे राष्ट्रीय राजनीति की चर्चा का विषय बना दिया।
नए दलों के गठन का बढ़ता रुझान
निर्वाचन आयोग के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 में 36 नए राजनीतिक दलों का पंजीकरण हुआ था। वहीं वर्ष 2024 में यह संख्या 148 तक पहुंच गई थी, जिनमें से बड़ी संख्या लोकसभा चुनाव से पहले अस्तित्व में आई थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी वर्षों में नए दलों के गठन की रफ्तार सामान्य वर्षों की तुलना में अधिक रहती है, क्योंकि विभिन्न सामाजिक, क्षेत्रीय और स्थानीय समूह अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने का प्रयास करते हैं।
चुनावी रणनीति में छोटे दलों की भूमिका
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कई गैर-मान्यता प्राप्त छोटे दल चुनावी मुकाबलों में अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डालते हैं। कुछ मामलों में बड़े राजनीतिक दल स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए ऐसे दलों या उनके उम्मीदवारों की मौजूदगी से रणनीतिक लाभ लेने की कोशिश करते हैं। हालांकि प्रत्येक दल की भूमिका अलग-अलग परिस्थितियों पर निर्भर करती है और इसे लेकर कोई एक समान निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
चंदे की व्यवस्था पर उठते रहे हैं सवाल
राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की व्यवस्था को लेकर समय-समय पर पारदर्शिता की मांग उठती रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान नियमों के तहत निर्धारित सीमा तक नकद चंदे के संबंध में अलग व्यवस्था लागू है। इसी वजह से छोटे राजनीतिक दलों की वित्तीय गतिविधियों को लेकर समय-समय पर सवाल भी सामने आते रहे हैं। हालांकि किसी भी दल पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच या न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही संभव होती है।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित है महत्वपूर्ण मामला
राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता बढ़ाने से जुड़ी एक याचिका फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। इस याचिका में राजनीतिक दलों को निर्धारित सीमा तक मिलने वाले नकद चंदे की व्यवस्था में बदलाव और सभी प्रकार के राजनीतिक योगदान को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग की गई है। शीर्ष अदालत ने इस विषय पर सुनवाई के लिए सहमति दी थी और मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है। इस पर अंतिम फैसला आने के बाद राजनीतिक वित्तपोषण से जुड़े नियमों में बदलाव की संभावना पर स्पष्टता आएगी।