MumbaiRain – जलभराव मामले में हाई कोर्ट ने नागरिक जिम्मेदारी पर उठाए सवाल
MumbaiRain- मुंबई में हाल की भारी बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने के बीच बंबई उच्च न्यायालय ने नागरिक जिम्मेदारी और शहरी अव्यवस्था पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि हर बार जलभराव के लिए केवल बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। न्यायालय का मानना है कि अतिक्रमण, बंद नालियां और सार्वजनिक स्थानों के गलत इस्तेमाल जैसी समस्याओं में आम नागरिकों की भूमिका भी कम नहीं है।

सड़क चौड़ीकरण से जुड़ी याचिका पर सुनवाई
यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आई, जिसमें बीएमसी ने सायन-ट्रांबे मार्ग के विस्तार के लिए अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। मामले की सुनवाई कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की खंडपीठ ने की। अदालत ने इस मामले में परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) को नोटिस जारी करते हुए उसका पक्ष मांगा है। बीएमसी का कहना है कि सड़क के अपने हिस्से से अतिक्रमण हटाया जा चुका है और आगे चौड़ीकरण के लिए विभाग की भूमि की आवश्यकता है।
जलनिकासी व्यवस्था पर नागरिकों की भूमिका
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति घुगे ने कहा कि शहर में जलभराव की समस्या केवल प्रशासनिक व्यवस्था से नहीं जुड़ी है। उन्होंने कहा कि नालों में कचरा और मलबा डालना, सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करना और जल निकासी के रास्तों को बाधित करना ऐसी समस्याएं हैं जिनसे हालात और गंभीर हो जाते हैं। अदालत ने कहा कि जब नागरिक स्वयं नियमों का पालन नहीं करते, तब केवल नगर निकाय को दोष देना समाधान नहीं हो सकता।
फुटपाथ और सार्वजनिक स्थानों के उपयोग पर चिंता
खंडपीठ ने फुटपाथों के दुरुपयोग का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि पैदल चलने वालों के लिए बनाए गए रास्तों पर कई जगह अवैध कब्जे, अस्थायी दुकानें और वाहन पार्किंग देखने को मिलती है। इससे न केवल आम लोगों को परेशानी होती है बल्कि शहरी यातायात और जल निकासी व्यवस्था भी प्रभावित होती है। न्यायालय ने कहा कि सार्वजनिक सुविधाओं का संरक्षण प्रशासन और नागरिक, दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि जब प्रशासन अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई करता है, तब अक्सर कानूनी प्रक्रियाओं का हवाला देकर कार्रवाई का विरोध किया जाता है। न्यायालय के अनुसार, सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करते समय नियमों की अनदेखी की जाती है, लेकिन कार्रवाई शुरू होने पर कानूनी अधिकारों का प्रश्न उठाया जाता है। अदालत ने संकेत दिया कि शहर के सुव्यवस्थित विकास के लिए कानूनों का समान रूप से पालन जरूरी है।
जुलाई के अंत में होगी अगली सुनवाई
बीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मिलिंद साठे ने अदालत को बताया कि वर्तमान में संबंधित सड़क लगभग 30 फीट चौड़ी है और उसके हिस्से से अतिक्रमण हटाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यदि अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराई जाती है तो सड़क की चौड़ाई बढ़ाकर 50 फीट की जा सकती है। इससे यातायात और क्षेत्र की आधारभूत सुविधाओं में सुधार होगा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के अंतिम सप्ताह में निर्धारित की है।