स्वास्थ्य

Health – कैंसर से जुड़े वायरल दावों पर विशेषज्ञ ने बताई वैज्ञानिक सच्चाई

Health- सोशल मीडिया पर कैंसर को लेकर कई तरह की बातें तेजी से साझा की जाती हैं। इनमें से कुछ दावे लोगों को भ्रमित भी कर सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने से पहले उसके वैज्ञानिक आधार को समझना जरूरी है। ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. वर्तिका ने हाल ही में कैंसर से जुड़े कुछ आम दावों पर अपनी राय साझा करते हुए बताया कि किन बातों में सच्चाई है और किन धारणाओं को तथ्य नहीं माना जा सकता।

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क्या बहुत गर्म चाय पीना जोखिम बढ़ा सकता है?

डॉ. वर्तिका के अनुसार, सामान्य चाय पीने और कैंसर के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं है। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक 65 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले पेय पदार्थों का नियमित सेवन करता है, तो भोजन की नली यानी इसोफेगस से जुड़े कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए चाय या अन्य गर्म पेय को थोड़ा ठंडा होने के बाद पीना बेहतर माना जाता है।

प्रोसेस्ड मीट को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ

प्रोसेस्ड मीट को लेकर किए जाने वाले दावे पर डॉक्टर ने कहा कि इस विषय पर वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने प्रोसेस्ड मीट को Group 1 Carcinogen की श्रेणी में रखा है। इसमें बेकन, सॉसेज, सलामी, हैम और हॉट डॉग जैसे उत्पाद शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक इनका नियमित और अधिक मात्रा में सेवन करने से विशेष रूप से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

क्या चीनी खाने से सीधे कैंसर होता है?

डॉ. वर्तिका का कहना है कि चीनी और कैंसर के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध साबित नहीं हुआ है। सीमित मात्रा में चीनी का सेवन अपने आप में कैंसर का कारण नहीं माना जाता। हालांकि, यदि अत्यधिक चीनी खाने से मोटापा बढ़ता है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। कई शोधों में मोटापे को विभिन्न प्रकार के कैंसर के जोखिम कारकों में शामिल किया गया है। इसलिए संतुलित मात्रा में चीनी का सेवन और स्वस्थ वजन बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है।

कैंसर का खतरा कम करने के लिए क्या करें

विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर के जोखिम को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं है, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन बनाए रखना और तंबाकू व शराब से दूरी रखना महत्वपूर्ण कदम हैं। इसके अलावा समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी किसी संभावित समस्या की शुरुआती पहचान में मदद कर सकता है।

स्वास्थ्य संबंधी जानकारी में बरतें सावधानी

डॉक्टरों का कहना है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उपलब्ध हर जानकारी सही नहीं होती। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी दावे पर भरोसा करने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है। वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर लिया गया निर्णय न केवल भ्रम से बचाता है, बल्कि समय पर सही इलाज और बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन में भी मदद करता है।

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